गीत – “सावन के झूले”
देखो सखि, अमवा तले पड़े झूले …२
चलो सखी,नभ को हम उड़ कर छूलें…२
अम्मा बाबा से आस जुड़ी है हमारी,
प्यारी यादों से भरी यह सुंदर सवारी!
देखो सखि….
चलो सखी….
रेशम के धागे में अपने सपने पिरो कर
सजाऊंगी सारे, मैं भैया की कलाई पर।
देखो सखि…
चलो सखी…
पहनाकर भाभी को, चुनरी हरी बांदीनी,
बनाऊंगी उन्हें भैया की सौभाग्यशालीनी!
देखो सखि….
आओ सखि….
बना रहे सुहाना, मायका हम सबका
कह रहा यही सखि,बादल नभ का!
देखो सखि….
आओ सखि….
स्वरचित एवं मौलिक।
शमा सिन्हा
रांची, झारखंड।