थिरकती है खुशिया,तुम्हारे पैरों

खोई कहां है चिंता,बंद है पडा,दूर फिक्र का घर

उडती है खुशी साथ उसके, लगा कर कोमल पर

यहाँ से वहां और फिर यहां,करती रहती वह दिन भर

जाने कहां से भर लाती है ,पाकेट मे यह शक्ति सागर!

कूदती ही रहती है बना बना कर गाती है गीतदिन भर!