देर

कहो समय, तुम गतिमान होते हो कैसे?

साथ चलकर आगे निकल जाते मुझसे ।

प्रयास  पद की गति रुक जाती हो जैसे।

और हाथ मांजती मैं रह जाती मूक ऐसे।

देख बिलंब जोड़ती मैं, खोये कितने पैसे।

मंजिल से दूर खड़ी, सोचूं पाऊं उसको कैसे ।

अब पछताय  क्या होता  देर हुई कुछ ऐसे

समय चला गया  पहले ,होश आया देर से ।