मंच को नमन
महिला काव्य मंच पश्चिम रांची जिला इकाई
तारीख :6 5.2026
शीर्षक -पश्चाताप "पश्चाताप"
कभी जब हो जाए कुछ ऐसा।
जब फल ना मिले मनचाहा जैसा।
लुट जाता है धरोहर का सारा पैसा।
तब भाव उपजता है कुछ वैसा।
मन का चैन, मन से हो जाता है दूर ।
संचित हिम्मत होती है चकनाचूर ।
टूट कर बिखर जाता है सारा गुरुर ।
गिर जाता है कारागार में वह शूर।
असह्य पीड़ा से जीवन बन जाता है बोझ।
लुट जाता है संचित सारा ओज ।
एक ही भावना उठती प्रतिपल रोज ।
उदासीन मन छुपने को करता पर्दे की खोज।
तब आती है अनेक बातें मन में।
दे जाती हैं जख्म अनेक, तन में।
चाहता है छिपना, सम्मान अंधकार गहन में ।
भारी कर जाता है पश्चाताप, निर्वाहण में।
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स्वरचित एवं मौलिक रचना।
शमा सिन्हा
रांची,झारखंड।