यादें

मंच को नमन
महिला काव्य मंच पर.रांची
तारीख:२४.२.२६
शीर्षक:”यादें”

ठहर जाती है जिंदगी जब
छाती में छुपा कुछ ऐसा तब
छाती यूं बीती घटनायें सब,
जैसे समय पुनः आया अब।

पीछे का सारा यूं उभर आता
सारी कथा फिर वह कहता।
उम्र मेरी वह कम कर देता
मन को मेरे, जैसे बहलाता।

खोई गुड़िया याद दिलाता।
भूली बातों को जागृत करता।
मन पंछी बनकर उड़ जाता।
गलियों वाली होलीखिलाता।

कुछ ऐसा जादू मुझपर करता।
खोये दिनों से फिर मिलवाता।
पुनः मैं बचपन में को जाती।
झोंका यादों का जब मुझे छूता।

स्वरचित एवं मौलिक।

शाम सिन्हा
रांची ,झारखंड।

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