विश्वास ही वह सीढ़ी है जिससे सफलता है पलती ।
आधारित श्रम शक्ति पर या फिर हो भाग्य की उदित विधी।।
प्रथम प्रयास होता विश्वास का जो मनुष्य को हैआगे बढ़ाता।
हर कदम पर ताकत लेकर वह सफलता पर चढ़ना सिखाता।।
विश्वास बूटी है जीवन संजीवनी ,जो लाती पथ में उजाला।
हटा अंधेरा रास्तों का, करती प्रज्जवलित प्रेरणा की चिर ज्वाला।।
इसी अग्नि से प्रेरित होकर निकलती सशक्त सपनों की चिंगारी।
जैसे बंजर भूमि में उगती है, अनगिनत फलित वृक्षों की हरियाली।।
मातृ-विश्वास से सृजित होता संतानों की सुसंस्कृत जीवन शैली।
विश्वस्थ निर्देशन से प्रेरित होती संतानों की कर्तव्य प्रणाली ।।
इसी विश्वास में बंध कर ही परिवार का पड़ता है आधार।
सुख-दुख की हर धूप छांव को, एक सूत्र हो सब करते पार।।
विश्वास की सुरक्षा,समाज को करता सफलता पद आसीन।
वीरता की लौ जलाकर,हर दुश्मन को करता अधीन।।
व्यक्ति ,परिवार ,समाज या विश्व ,सुरक्षा का यही एकमात्र कवच है ।
रख सकता जो सबको सुरक्षित ,मानवता का आधार यही है ।
स्वरचित एवं मौलिक।
शमा सिन्हा
रांची,झारखंड।