गुरू गोविंद सिंह

"गुरू गोविंद सिंह"

सिक्खों के हुये नायक ,मां भारती के गोविंंद बने वीर सुपुत्र ।
यशस्वी बन गये पाकर,नौवें वर्ष ही में राज पाठ कासूत्र!

पिता इनके नौवें गुरू तेग बहादुर !जिनसे स्थापित हुआ सिख धर्म!
समाज की देकर जिम्मेदारी,नेतृत्व दिखाए उन्होंने सुकर्म !

यौवन के पूर्व ही बन गये गोविंद रक्षक नव भारत सीमा के!
मुगलों से ले लिया टक्कर,होनहार ने दिखाई वीरता सिद्ध कर के!

पगड़ी की लाज बचाई,अपनी मां के दूध का मोल चुकाया,
झुकाया

ना सिर मुगलों के आगे,पाया शौर्य वीर गति का!

अपने चारों पुत्रों को भी मातृभूमि पर किया न्योछावर!
पिता गोविंद के कदमों पर चल कर वीरगति पाये जुज्झर,फतेह और जोरावर !

गुुरू तेगऔर माता गुजरी का पुण्य प्रताप फलित हुआ वरदान!
उनका वीर-कवि-विचारक पुत्र गोविंद का, बना हरिमंदिर पटना जन्मस्थान!

जिससे बना विलक्षण इतिहास भारत का,आदर्श बना उनका बलिदान !

कितने ही अगिनत सहस्त्र युग बीते,गुरु गोविंद की बनी रहेगी शान!

(स्वरचित एवं मौलिक रचना)

शमा सिन्हा
रांची।
तिथि-: 17-1-24