धानी

नमन मंच।
महिला काव्य मंच पश्चिमी रांची जिला इकाई।
दिनांक -२३.७.२५
विषय -धानी
विधा -कविता धानी

बरस रहा देखो झर झर पानी
पसर रहा है रंग चहुंओर धानी
कह रहा मोर,देख कर मोरनी,
सुन कुछ बोल मेरे,ओ सजनी!

देखो, छाए घने बादल काले,
बरसा रहे बूंदन के फूल प्यारे!
खेतों में सज रहे धानी नजारे,
आओ सखी हम कजरी गायें!

कहो मेहंदी से,रंगजाये धानी!
रंगे सुहागिन को खुश्बू सुहानी,
भर जाये जब मैदानों में पानी,
देखो झूला झूले रही,मस्तानी!

टर्र टर्र बोल रहे मेढक पानी में,

शायद बतिया रहे वे मछली से!
कीड़ों को एैसे न्योता दे रहे वे,

लम्बी जीभ से उन्हे लपक रहे!

स्वरचित एवं मौलिक।

शमा सिन्हा
रांची झारखंड