नारी तू नारायणी

[09/03, 09:31] +91 92188 87941: नमस्कार प्रिय रचनाकार साथियो 🙏

मानसरोवर काव्य मंच पर हम आपके लिए एक नई प्रतिस्पर्धा लाए हैं।

दिनांक :- ०९ मार्च २०२६

शीर्षक :- 🇮🇳 ” विश्व विजेता भारत “ 🇮🇳

विधा :- कविता, छंद, दोहा, गीत, गज़ल, भजन

पंक्ति सीमा :- १२-२० पंक्तियाँ

समय सीमा :- १० मार्च २०२६
रात १२ बजे तक

प्रमुख बिंदु

  • आपकी अपनी स्वरचित रचना ही मान्य होगी।
  • सभी रचनाएं हिन्दी में ही मान्य होगी।
  • रचना की मौलिकता की जिम्मेदारी स्वयं लेखक की होगी।
  • कृपया आरम्भ में दिया गया शीर्षक लिखें।
  • अंत में स्वरचित एवं मौलिक लिख कर अपना नाम अवश्य लिखें।
  • प्रत्येक पंक्ति के बाद पूर्ण विराम अवश्य लगाएँ।
  • सभी पंक्तियाँ बराबर हों, कोई बड़ी या कोई छोटी न हों।
  • प्रथम, द्वितीय और तृतीय आने वाले रचनाकारों को प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएँगे।
  • मानसरोवर साहित्य
  • मासिक ई बुक पत्रिका
  • मार्च २०२६
  • विषय -नारी तू नारायणी

“नारी तू नारायणी “

केंद्र उस बिंदु शक्ति का है, नारी तू नारायणी!
नव -रचिता रचना की ,पथिक अनुकुली परीस्थिति की।

दृष्टा तू अलौकिक है, स्वप्न साकार रूप प्रदायिनी!
नव निर्माण सिंचिता , विचार- भेदी बाण प्रदायिनी।

गहन गूलर सी ज्ञानी,तू सहज शांत रूप शक्तिशाली!
तू है चट्टानों को अपघटन कर मिट्टी सा, घोलने वाली ।

तू स्वतंत्रता संग्राम की हुंकार “लक्ष्मी” ,तू “सावित्रीबाई” विद्या वर्धिनी।

तू” सरोजिनी” अवज्ञा आंदोलन की,
“कल्पना” तू अन्तरिक्ष उड़ान की !

होती ना तू तो बनती कौन जग की सृजन हारिणी?
रंगता कौन जग में उमंग,सजाता परिवार बन गृहणी?

लेकर तन मन की शक्ति पर ब्रह्म निरूपित हुई है नारी!
पूछो नहीं चाहिए उसे क्या, वह खुद निर्णय करने वाली।

बन परिंदा, छोड़ आंसुओं को,चल पड़ती वह आसमान छूने।
हर पल को है वह जीना चाहती ,लेकर श्वास खुली हवा में।

अबला नहीं,वह चपला है, वह है हिम्मत की चिंगारी!
परिवार एकता सूत्रधार वह,जो सदा बिखेरे रोशनी।

परम आत्मा की अपराजेय रुपिणी, वही लक्ष्मी -सरस्वती- दुर्गा ।
आज बनी स्वयंसिद्धा वह, लेकर निज कर्मठता का सहारा!

स्वरचित एवं मौलिक।

शमा सिन्हा
रांची,झारखंड।