नमन मंच ।
मानसरोवर साहित्य अकादमी नवाक्षर मासिक की पत्रिका 2026 हेतु।
विषय-” मातृत्व और ममता”
विधा: कविता।
“मातृत्व और ममता “
समझ मातृत्व का लाता आचार शुभता की जागृति।
ममता बनाती नारी को न्यायशील प्रेममयी कृति।
बहती रहती अमृत धारा सतत उसमें ।
बनी वह सर्वश्रेष्ठ परमेश्वर की रचनाओं में।
मगन चिंता से परेशान परब्रह्म, गुंजित एक प्रश्न था।
कौन रक्षक होगा उसकी इस सौहार्द्रपूर्ण रचना का ?
चिंतित वह सोच रहा था ,दूं किसको यह भर निभाने को।
जो होअष्टभुजा सी शक्तिशाली प्रहरी बनने को।
उमंगित रहे मन सदा,हो कोमल हृदय फूलों सा ।
उत्कृष्ट चेतना हो जिसमें अपनी जिम्मेदारी का।
तन बालक का पुष्ट कर सके जो अपने धर्म बल से।
कर सके जो मन को शिक्षित जीवंत मुमुक्षु बन के।
कर दे प्रकाशित अनभिज्ञ पथ, सूर्य बनकर।
सत्यापित हो जिससे उद्धृत मन वचन कर्म कर।
सबल स्नेह की करें भाषा पूर्ण परिभाषित।
कर्तव्य परीक्षा दे सके जो शब्दों में प्रमाणित।
पिला कर घूट निश्चल ममता का वह अपनी।
गढ़ दे उज्ज्वल चरित्र, बनकर सिद्धहस्त अवनी।
रखे सदा मानवता का वह नित ऊंचा आदर्श।
गढ़ कर सत्कर्म आधार, उपजाने को समाज में हर्ष।
भारतीय नारी है ममतामयी मातृत्व का वही रूप।
पालना कर रही ऐसी, जिससे हिंद संतान बन रही विश्व भूप।
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स्वरचित और मौलिक रचना।
शमा सिन्हा
रांची, झारखंड।