मंच को नमन
महिला काव्य मंच पश्चिमी रांची जिला इकाई
तिथि: 2.6 2026
दिन: मंगलवार
विषय: मेरी आंखों का तारा
मेरी आंखों का तारा
देखा है मैंने भी एक सपना बहुत ही प्यारा।
खेलेगा एक दिन मेरे गोद में मेरा दुलारा।
बनेगा वह कान्हा जैसा सबका ही न्यारा ।
गूंजेगी की किलकारी उसकी, आंगन और चौबारा।
देख गुणों को पूछेंगे सब, किसने है इसे सावरा?
लेकर सौ बलैया उसकी जाएगा जग सारा।
बन जाऊंगी मैं यशोदा, वह होगा मेरा लल्ला।
देख रूप मनोहर उसका जग में होगा हल्ला।
खेल खेल में उठ भागेगा वह नीचे से दो तल्ला।
घबराकर मैं दौड़ूंगी, लगाने सीढ़ी पर ताला।
वह हटीला हंसकर मांगेगा चांद आसमान वाला।
मुझे रिझाने को मनाएगा ,जैसे हो कन्हैया काला।
सच ही मैं देखूंगी क्या, माधव को खेलते दोबारा?
फिर तो छुपा कर रखना होगा, जाने न जग सारा।
देख लीला माधुरी पूछेंगे,किसका है यह छोरा।
बुद्धि विवेक की देख चेतना, जग जाएगा हारा।
तेरे सिवाय यशोदा नंदन, मेरा ना कोई सहारा ।
तू लाठी बुढ़ापे की ,तू ही मेरी इन आंखों का तारा।
…………….
स्वरचित और मौलिक रचना।
शमा सिन्हा
रांची ,झारखंड।