तुम ही मेरे मोहन तुम्हीं राधा हमारे ,
नहीं कोई मेरा अब सिवा तुम्हारे।
गलतियां मुझसे हुई हैं बहुत सी,
किया माफ सबको समझ नादानी।
घबड़ाकर सदा, मैंने पकड़ा तुम्हें ही,
दिया है सहारा तुम्ही ने सदा ही।
घनघोर कितना भी छाया अंधेरा,
दिया मेरी रात को है नया सवेरा।
बढ़ाया है हाथ, को मैंने अपने,
किये पूरे तुमने मेरे सारे सपने।
है आस मुझको आज भी तेरा,
रक्षा करेगा मुझको तेरा घेरा।
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