दिलीप उसके घर में एक किराएदार की तरह से रहा था तब उसका व्यवहार शीला को अच्छा लगता था ज्यादा बोलता ना था अपने काम से मतलब रखता प्रातः ही वह अपनी ड्यूटी पर निकल जाता और रात में देर से लौटता स्कूल की ड्यूटी करता था स्कूल के प्रिंसिपल की गाड़ी चलाता था स्कूल समय खत्म होने के बाद वह एयरपोर्ट पर यात्रियों को घर पहुंचने का काम करता था उसने अपनी एक छोटी गाड़ी खरीद ली थी और उसी से वह आमदनी करता था अभी उसकी शादी ना हुई थी इसी बीच वह शीला के घर में रहा शीला उससे प्रभावित थी उम्र बढ़ती जा रही थी और शीला का शरीर थक रहा था ऐसा हुआ ऐसा संजोग पद की शिला अपने घर को छोड़कर अपने बच्चों के पास रहने लगे तब अब घर को कैसे संभाला जाए यह उसके लिए बड़ी समस्या थी घर में वह अकेले रह नहीं सकती थी और बच्चे उसके घर में नहीं आकर रह सकते थे रोजी-रोटी कमाने के लिए सभी बच्चे दूर-दूर चले गए थे फिर सवाल उठा कि अब इस घर को रखा जाए या नहीं बड़े बेमन से घर को बेचने के लिए तैयार है लेकिन बचना भी इतना आसान न था वह सोचा करती कोई अच्छा भला मानस मिले जो सही समय से और अच्छी तरह अच्छा दान दे और समय पर दे तो उसे वह भेज दे लेकिन सभी उसको देखकर उसकी कमजोरी पड़कर उसके दयालुता का फायदा उठाते हुए कोई ना कोई ऐसा शर्त रखने की वह हर जाति इतने तिकड़म के बावजूद वह अपने घर को बेचने को तैयार थी बच्चों का भी यही कहना था कि उन्हें अब घर से कोई मतलब नहीं अब वह बहुत दूर आ गए हैं और फिर कभी लौटकर घर नहीं जाएंगे पिता ने तो दोनों बच्चों के लिए ऐसा घर बनाया था जिसमें बिल्कुल रिप्लिका दो पार्ट हो जाता था दोनों ही तरफ गेट थे दोनों के लिए अलग-अलग पानी की टंकी थी दोनों के लिए अलग-अलग सेप्टिक टैंक था और रास्ते भी एक दूसरे को काटते ना थे फिर भी बच्चे अपनी हौसला और अपनी मेहनत से उन्होंने ऊंचाई प्राप्त कर ली और पिता के सजे हुए धन परिवार आश्रित ना रहे यह कहे तो शीला का सौभाग्य ही था कि उनको उसके दोनों बच्चे अपने पांव पर खड़े थे किंतु घर का भाग्य ऐसा था कि शीला के पिता शीला के पति घर बना कर भी उसका सुखना रोक सके कम उम्र में ही उनकी मौत हो गई और शीला नितांत अकेले हो गई कुछ दिनों तक तो उसने बड़े हौसले से घर को सजाया संवारा और बना कर रखा किंतु धीरे-धीरे उसका हौसला कमजोर पढ़ने लगा वह शरीर से कमजोर थी और नाते रिश्तेदार भी उसी की उम्र के थे अतः वह बुलाती भी तो किसको बुलाती फिर अकेला घर संभालने में बहुत तरह की आवश्यकता पड़ती है एक फ्लैट के वनस्पति उसमें हर चीज खुद करना पड़ता है फ्लैट की फ्लैट का क्षेत्रफल सीमित होता है एक दरवाजे के अंदर वह बंद हो जाता है किंतु घर की सीमा 18 होती है चारों तरफ उसके जमीन जगह और उसकी सफाई उसके रखरखाव में फ्लैट के बेनिफिट बहुत अधिक मेहनत करना पड़ता है शीला से इतनी मेहनत नहीं हो पा रही थी अत उसने भी निश्चय किया किया वह घर भेज दे एक सज्जन मिले भी कहने को तो वह बड़े ही रईस और उनके माता-पिता भी बड़े होने वाले थे उन्होंने वादा किया कि कुछ एक बहुत जल्दी हो वह सारा पैसा एक साथ दे देंगे उन्होंने तारीख भी निश्चित कर दी किंतु तारीख पर कर गई और पैसा नहीं आया शीला बिल्कुल परेशान हो गई अंतत उसका पुत्र और उसकी पुत्री दोनों उसके लिए खड़े हो गए और कानूनी तौर पर उन महानुभावसे उसका उसका पीछा छूटा किंतु वह 6 महीने कैसे गुजरी यह उसी का मन जानता था रात दिन बस एक ही चेहरा उसके सामने घूमता था नाता भी टूटा रिश्ता भी कमजोर पड़ा बदनामी भी हुई और उसका मन भी टूट गया अब उसने निश्चय कर लिया कि कोई भी निर्णय स्वयं नहीं लगी अपने बच्चों से ही लाइव आएगी उसके बच्चे उसको देखते ज्यादा समझदार थे वह व्यावहारिक थे अकेले ही अपने भविष्य का निर्माण किए थे अतः उन्हें दिन दुनिया की ज्यादा अकल थी ज्यादा समझदारी थी इसी बीच घर में रह रहे अनेक किराएदार जो रहते थे छोटे-छोटे ही सही किंतु बड़े ही अपनेपन से उसके साथ व्यवहार करते थे अचानक घर बिकने के समाचार के साथ सीमा ने उन्हें घर छोड़ने का भी आदेश दे दिया ले दे करके एक पंडित जी बच्चे जिन्होंने अपने कर्तव्य को इतनी अच्छी तरह से निभाया किंतु आज उन्होंने अपना घर बना लिया और वह अपने घर में जाना चाहते थे सीमा को उन्होंने खबर दी कि वह इस महीने के अंत तक घर छोड़ देंगे सीमा चटपटा गई अब घर कैसे रहेगा अब मेरा घर कोई देखने वाला नहीं अभी तक वह निश्चिंत होकर परदेस में रहती थी वह समझती थी कि कोई भी आवश्यकता पंडित जी का परिवार स्वयं ही देख लेगा घर में किसी भी चीज की कमी होगी तो पैसा भले मांग ले पैसा किराए से काट ले लेकिन वह सीमा को परेशान नहीं करेंगे किंतु अब तो वह जा रहे थे और सीमा का वहां आना और उनसे चाबी लेना अपना घर बंद करना बहुत आवश्यक तक आवश्यक था सीमा घर पहुंची घर बिल्कुल उसी तरह से था जैसे उसके समय में रहता था। बाहर का बगीचा अल्लाह रहा था अंदर का आंगन भी साफ सुथरा था वह कमरे का ताला खोलकर अपने घर में प्रवेश की और अंदर की ओर झांकी थोड़ी सी धूल थी लेकिन उसके रहने लायक घर बना हुआ था वह बड़ी प्रसन्न हुई शांत हुई की तो दूसरे ही इच्छा उसे याद आया कि वह तो आई है पंडित जी से घर की चाबी लेने और घर को बंद करने के लिए कुछ और भी आवश्यक काम थे वह भी उसे करके ही जाना था अब वह अपने घर में रहने लायक नहीं थी और उसका भी मन रहने को नहीं करता था वह इतनी जिम्मेदारी नहीं संभाल पा रही थी उसे गैस कनेक्शन वापस करना था उसके पास दो गैस कनेक्शन थे एक अपना और एक अपने पुत्र का ले देकर चार सिलेंडर उसके पास रहते थे इधर ईरान और इराक के युद्ध के चलते गैस की बहुत ही किल्लत हो गई थी और गैस मिल नहीं रहा था सभी गैस के लिए परेशान थे भूतों के हाथों खाना मिनिमम बनने लगा था कुछ लोग फल और ताजे बने नाश्ते पर एक रहते थे क्योंकि गैस की किल्लत थी अतः खाना बनाने में खाने का वृहद प्रयोजन नहीं पूरा हो पता था
उसके पास दो सिलेंडर पूरे भरे हुए थे एक लगा हुआ था गैस के चूल्हे के साथ और एक खाली था उसे याद आया कि दिलीप ड्राइवर ने कहा था कि वह पुनः उसके घर में रह सकता है और उसके घर की देखभाल कर सकता है उसने आते ही दिलीप को फोन लगाया और उसे आने को कहा दिलीप आया और फिर बात होने लगी उसने पूछा तुम आज 4:00 बजे कैसे खाना खा रहे थे दिलीप ने कहा गैस की इतनी कमी हो गई है कि घर में छोटा सिलेंडर था जिसको मैं भरवारा था लेकिन अब उसने भी गैस नहीं है पता किसी तरह से कुकर में उबाल कर खाना बनाता हूं और खाता हूं अचानक उसके मुंह से निकला मेरे पास एक सिलेंडर है वह बोला आंटी मुझे दे दीजिए ना मुझे बहुत तकलीफ हो रही है सीमा को दया आ गई उसने कहा कि मुझे खाली सिलेंडर चाहिए लेकिन फिर मैं लेकर के आता हूं और वह फिर उसने पूछा क्या तुम मेरे घर में रहोगे उसने कहा अभी मैं जहां रह रहा हूं मुझे वहां कोई दिक्कत नहीं है वहां सब चीज बड़े ही आराम से किचन भी बना हुआ है और मेरा सामान भी वहां अच्छी तरह से एडजस्ट हो गया है मुझे बार-बार सामान लेकर के कहीं जाने में बहुत दिक्कत होती है सीमा समझ गई वह रहना नहीं चाह रहा था लेकिन अब तो गैस की बात उठ चुकी थी और वह इनकार नहीं कर सकती थी उसने कहा तुम सोच लो ऐसे तो अब हम तुम्हारी क्या मदद करें कुछ पैसे कम देना लेकिन रहोगे तो मुझे भी आराम रहेगा और घर भी देखभाल होगा उसने कहा मैं समझता हूं आंटी आपके घर की देखभाल और कोई रहेगा तो यह सुरक्षित भी रहेगा आजकल तो “जैसे तैसे लोग घर में घुस जाते हैं”
यह चोर उचक्के और सामाजिक लोगों का घर में घुसना ताला तोड़ना इन सब की इन सब घटनाओं की बात उसने सीमा ने कई लोगों से सुनी थी और उसका दिल भी अब डर रहा था वह घर अकेला छोड़कर नहीं जाना चाहती थी लेकिन जिसका उसने उम्मीद किया था वह आज इनकार कर रहा था जब वह चली थी अपने घर के लिए तो उसने फोन से बात किया था दिलीप से और दिलीप ने स्वीकारा था कि वह रह सकता है उसके घर में किंतु आज दिलीप ने जो बात कही तो उससे साफ हो गया कि वह इस घर में नहीं आना चाहता बात खत्म करते हुए उसने कहा ठीक है तुम अपने से सोच लो कोई जोर जबरदस्ती नहीं है लेकिन हां रहते तो अच्छा लगता दिलीप तो अपने स्वागत में अटका हुआ था उसने उसे बात का जवाब नहीं दिया लेकिन कहा कि मैं अभी तुरंत सिलेंडर लेकर के आता हूं खाली सिलेंडर दे दूंगा आपको और कितने पैसे लगेंगे आंटी उसने कहा कि जो कंपनी का दम लगता है वही दे देना उसने कहा कितना सीमा ने कहा 1000 इस पर बात तय हो गई काफी देर और दिलीप निकल गया घर से काफी देर हो गई रात की राय थी सीमा भी खुश थी कि चलो दिलीप से पाला छोटा और वह गैस का सिलेंडर नहीं मांगने आएगा किंतु शाह-सही गेट पर आवाज हुई और दिलीप एक साथी के साथ घर के अंदर आया वह एक पुराना सिलेंडर लेकर के आया था और उसने कहा कि यह है इंडियन का सिलेंडर इसे आप रख लीजिए और मुझे नया सिलेंडर दे दीजिए उसे समय सीमा के साथ उसके मायके का एक सेवक भी था वह बड़ा ही बोलने में चतुर था और हर बार हर बार हर काम को आगे आगे बढ़कर किया करता था उसने कहा यह सिलेंडर तो एक का है इंडियन का यह हालांकि वह ऐसा घिस सिलेंडर था जिस पर नाम दिख ही नहीं रहा था अंत में वातावैसी हुई और लेकिन दिलीप सिलेंडर लेकर के चला गया उसने पैसे के जगह पैसे का पैसे के लिए कहा कि मैं किसके नाम से ट्रांसफर कर दूं सीमा ने कहा कि कैश दे दो उसने कहा कैश तो मैं नहीं लाया हूं तो उसने कहा कि ठीक है इसी लड़के के अकाउंट में तुम डाल दो
जाने क्यों आज वह फिर हरि सी महसूस कर रही थी उसे बड़ा ही अफसोस था कि उसने भी क्यों नहीं चतुराई की क्यों नहीं वह पड़ गई और सिलेंडर उसे वापस कर देता उसका नहीं लेती लेकिन अब तो चिड़िया चुप चुकी थी खेत अब उसके पास कोई मौका ना था फिर उसने अंतर मन से पूछा अब क्या करना चाहिए और बार-बार इस चीज को दोहराते हुए अंत में वह इसी निर्णय पर आई कि जो भी सिलेंडर बचा है उसे वह ठीक से रखें क्योंकि गैस की इतनी कमी है कि हो सकता है कि अगली बार जब वह घर में आए तो उसके पास खाना बनाने के लिए गैस ना रहे उसने फोन उठाया और जिस कंपनी को वह वापस करना चाहती थी गैस उसके वेंडर को लगाया वेंडर ने फोन नहीं उठाया वह चाहती थी मना करना कि अब उसे भरा हुआ सिलेंडर नहीं देना है वेंडर से बात नहीं हुई फिर उसने सोचा कि शायद यह भी उसकी अच्छाई के लिए ही है और वह अपना कनेक्शन नहीं देगी और बेटे का ही कनेक्शन वापस करेगी क्योंकि उसके पास दो खाली इंडियन सिलेंडर गैस थे दूसरी सुबह का इंतजार करती हो रात भर चिंता में करने रही खड़ा होकर उसे बोलना नहीं आता था और घर का जो सेवक था वह आगे बढ़ चढ़कर के हर निर्णय अपने ही से ले लेता था उसे अच्छा नहीं लगता लेकिन वह क्या करती मां मजबूरी में वह मायके से उसे लेकर आई थी ताकि किसी तरह से पंडित जी के जाने पर घर को वह बंद करके सफाई कर कर बंद कर दे और फिर उसके साथ वापस चली आए लेकिन अब लग रहा था कि घर में इतना सामान जो भरा है उसे भी खाली कर देना चाहिए अब रखना उचित नहीं उसने एक पैकेट मूवर को बुलाया और उनसे बात की बातचीत तय हो गई उसने सोचा कि थोड़ा सामान वह अपने अपने दूसरे मकान में कर देगी जहां उसका फ्लैट था । उसने इतना दिमाग लगाया था सारी प्लानिंग की थी कि वह किस तरह से अपने घर को अपने कंट्रोल में रखेगी किंतु आज दिलीप की चतुराई ने उसे मार देती थी उसे ऐसा लग रहा था जैसे वह दिलीप को अपने मतलब से बुलाई थी और अपने घर के बेहतरीन के लिए उसको रखना चाहती थी किंतु दिलीप ने बड़ी चतुराई से उसको ठग लिया था। अब जो होना था सो हो चुका उसने सोचा कल से मैं सोच समझ करके कदम आगे पढ़ाऊंगी अगर गैस वापस भी करना है तो बेटे वाला कनेक्शन को वापस कर दूंगी क्योंकि अब उसमें भारत सिलेंडर कोई नहीं है किंतु मेरा सिलेंडर एक भरा हुआ है अतः मेरे लिए आवश्यक है कि मैं अपने रोटी का इंतजाम करके रखूं ।अ अगले दिन सुबह ही वह तड़के उठी और स्नान करके अपने पूजा पाठ से नहीं पाती जब तक दिमाग खाली ना हो निर्णय ठीक नहीं होता वह शांति से सोचना समझना चाहती थी किंतु एक साथ इतने काम आ गए थे घर की सफाई लोगों से बातचीत आगे का इंतजाम पंडित जी छोड़ रहे थे घर वह सब हिसाब किताब लेना कि वह परेशान सी थी अंत में उसने निश्चय किया अगर कुछ ना हो सकेगा तो मैं वापस ही चली जाऊंगी फिर बेटी को लेकर आऊंगी शायद दो मिल करके एक पर एक ग्यारह हो जाएंगे और निर्णय ठीक होगा ।
बेटी का साथ उम्मीद की नई किरण थी उसने सोचा पत्नी की छुट्टी हो जाएगी तो फिर वह दोनों तीनों मिलकर के आएंगे और सारा सामान व्यवस्थित करके घर को अच्छी तरह से बंद करके चले जाएंगे। घर को बेचना है यह सब जान गए थे और खरीदार भी आने लगे थे लेकिन सीमा से अब निश्चय नहीं हो पता था वह समझ रही थी कि उसका दिमाग अब उतना कम नहीं करता यादाश्त कमजोर हो गई थी लेकिन वह करती भी तो क्या करती बच्चों को छुट्टी कहां मिलती है आजकल रोजी-रोटी इतनी ज्यादा मेहनत की मांग के साथ आती है कि वह उसी में मकड़े की तरह फंसे हुएफंसे हुए जाल में अटके रहते हैं। लेकिन उसे एक बात पता था कि उसे जो भी करना था स्वयं करना था अतः उसे गिर कर उठना होगा ही गलती हो सकती है किंतु उसका सुधार भी होता है और यही सोचकर उसने अपनी सिरहाने राखी एक किताब को उठाया और उसके दो चार पन्ने पड़े ताकि सहजता से उसे नींद आ जाए।