मान सरोवर साहित्य अकादमीनवाक्षर मासिक ई पत्रिका अंक 13अप्रैल 2026विषय: संघर्ष और श्रमविधा -कविता “संघर्ष और श्रम “

संतुष्ट इंसान की है, बस एक ही कहानी।

श्रम के रंगों से रंगी है उसकी जिंदगानी ।।

कर्मों के संघर्ष से मनुष्य पाता पांच भूत काया।

बनाकर घटनाओं को आधार , लिखती कहानी माया।।

तोड़ कर पाषाण, होता अंकुरित बीज जैसे।

श्रम करता पल्लवित सफलता को, वैसे ही संघर्ष से।।

चाहता हर इंसान ,पाना सुख की बागडोर को ।

करता जो श्रम निरंतर, सौभाग्य मिलता उसी को ।

स्वप्न होते हैं साकार वहीं,जहां तपता है संघर्ष।

सतत रहता श्रम जहां, वहीं उपजता है हर्ष।।

नदी की बहती धारा,यात्री को मंजिल नहीं है देती ।

निर्दिष्ठ दिशा में जब तक मल्लाह की नांव नहीं है चलती।

करना हो ज्ञानार्जन अथवा सुलझाना विज्ञान पहेली।

चिरंतन संघर्ष से ही, रौशन होती हैं राहेंअंधेरी।।

अकर्मण्यता से सुलझ नहीं सकती ,जीवन की पहली।

बिन श्रम -सेवा-संघर्ष बिना, कुसुमित होती नहीं चमेली।।

देने को समृद्धि, निरंतर
करता भ्रमण दिवाकर।

प्रभा ना वह जो फैलाएं, तो कहलाएगा ना दिनकर।

स्वरचित एवं मौलिक।

शमा सिन्हा।
रांची,झारखण्ड।