भारत भूमि नमन तुम्हें

तुम्हें नमन शत-शत बार ऐ भारत भूमि हमारी ।

तेरे ही सानिध्य मे अमृत तुल्य संतुष्टि मिलती पूरी।

सम्मान सबका रखने वाली, जागृत भूमि क्रांतिकारी ।

इतिहास गवाह है, यह ना कभी बनी आक्रमणकारी ।

है सभ्यता भारत की समस्त विश्व में सबसे ही पुरानी। 

पांच हजार वर्ष से पूर्व,जीवित थी सभ्यता सिंधु घाटी।

700 वर्ष ईसा पूर्व,तक्षशिला बनी विश्व विद्यार्थि  केंद्र।

बीजगणित ,त्रिकोणमिति,दशमलव,योग, के जन्मे विप्र।

ऋग्वेद अनुकरणीय,सभा -समिति -लोकतंत्र की जननी  मां भारती ।

लिच्छवी राज की वैशाली ने संगठित किया था सक्रिय जन भागीदारी।

११ ई.श्रीधराचार्य ने  दस का ५३ तक का स्थानीय नाम दिया।

६ ई. में पाइथागोरस प्रमेय सुलझाकर बुद्धआयान ने स्तब्ध किया ।

भास्कराचार्य ने बताया सूर्य के चारों ओर पृथ्वी परिक्रमा का समय

आधार रखा प्रथम चिकित्सीय प्रणाली “आयुर्वेद” का  चरक ने।

छठी ई.ईसा पूर्व शल्य तंत्र,साधन उपकरण ज्ञान दिया  सुसृत ने।

दुनिया के अनेक धर्म, हिंदू बुद्ध,सिख और जैन जन्म स्थान है भारत।

१९८२में बना सबसे ऊंचा भारतीय”लद्दाख का बेली ब्रिज”   ।

भारतीय रेलवे है संसार का सबसे वृहद रोजगार उपलब्ध क्षेत्र।

भारत रहा है १८९६ तक, हीरो के खान का श्रेष्ठतम उत्पादक केंद्र।

“अन्नधान्य स्वयं पूर्णता “प्राप्त भारत बना “अग्रणी स्वदेशी अंतरिक्ष केंद्र”।

विशाल लोकतंत्र को दे रहा “एकीकृत भुगतान इंटरफेस “उच्च साक्षरता दर।

नमन है उन सब भारत वासियों को ,बंधे हैं अटूट एकता में प्राण।

सीमा सैनिकों के बलिदानों को प्रणाम, जिन्होंने रखा मां भारती की शान।

स्वरचित और मौलिक।

शमा सिन्हा

रांची  झारखंड।