नमन मंच ।
मानसरोवर काव्य मंच। तारीख: 9 .6.2026
शीर्षक :”बात छोटी है पर गहरी है”
विधा- कविता
“बात छोटी है पर गहरी है “
छेड़ कर विश्व में युद्ध, अनेकों ने है यह जाहिर किया।
है नहीं फ़िक्र अगली पीढ़ी की ,उन्होंने है साबित किया।
बात छोटी है पर है गहरी….
हो रहे घर अंधेरे ,है नहीं सरोकार उन्हें ।
जाने किस वर्चस्व के लिए अपनों पर है वार किये।
बात छोटी है पर है गहरी….
घर घर ए सी लगाकर गर्मी को करना चाहा दूर।
विवेक को देकर तेलांजलि यंत्र उपयोग कर रहे भरपूर ।
बात छोटी है पर है गहरी……
खाना बनना हो गया घर में अब बिल्कुल बंद।
सिलेंडर फटने के डर से हम हो गए हैं स्वच्छंद।
बात छोटी है पर है गहरी…..
“स्विग्गी, जोमैटो” का फैल रहा विस्तृत है राज्य।
किंतु यह रोजगार ला रहा अनेक बीमारियों का साज।
बात छोटी है पर है गहरी……
स्वरचित और मौलिक।
शमा सिन्हा
रांची, झारखण्ड।