मंजिल अभी दूर है

मंच को नमन।
मानसरोवर काव्य साहित्य मंच
दिनांक-2 जुलाई 2026
शीर्षक -मंजिल अभी दूर है
विधा -कविता "मंजिल अभी दूर है"

कौन कहता है मुसाफिर, कि तुम्हारी मंजिल अभी दूर है।

अगर हौसला बुलंद है हर कदम एक नई सहर है ।

देता है उजाला हिम्मत ,जैसे सूरज है नभ पर।

खड़े ना रहो चौराहे पर, भटकाएगी तुम्हारे मन को।

बड़ा कदम चलते चलो अपनी सीधी राह पर।

जब आए मोड़ तो पूछो अपने मन को।

चाहता वह क्या है मंजिल उसकी क्या है।

भटको ना चाहतों के बीच, वह तो सदा बुनती सपना है।

उसकी गिनती अथाह है, उसका ना कोई किनारा है ।

डरो ना अंधेरे से ,कह दो साथ तुम्हारे उजाला है।

दिखाएगा वह तुम्हें विहान, जहां पहुंचने का इरादा है।

हौसले को रखो बुलंद,भटको ना अपनी राह से।

निशा से लग रही गले उषा,
कौन कहता है कि मंजिल अभी दूर है ।
………….

स्वरचित और मौलिक रचना।
शमा सिन्हा
रांची झारखंड ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *