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रोको ना मुझे
बह जाने दो मुझे, अब जिधर मन चाहता है। रोको ना आज मुझे, यही आज जी चाहता है ।। बेगानी हवायें खींच रही,मन दिशा चाहता है। नये सावन की टपकती बूंदें पीना चाहता है।। पूछो ना मुझसे कुछ,कारण ना कहो बताने को।रोको ना मुझे,पहले जरा स्वाद उनका ले लेने दो। देखा था मैंने पत्तों से…
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अच्छा लगता है
अच्छा लगता है सुबह शाम की तफरी। जबरदस्ती,पैर तलाशते हैं अपनी हस्ती।। छुप कर बगल से जब चंचल हवा है गुजरती। छूकर तन मन को, वो व्याकुल सा कर जाती।। लगता है वे मुझे अपने संग उड़ा ले जायेंगी। मुस्कुराते चेहरों से कभी भेंट करायेंगी।। कभी करूणा भरी तस्वीरें मुझे दिखायेंगीं। मेरी ज़िन्दगी कैसी हो…
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मंच को नमन।
लेखनी रचना का संसार दो दिवसीय आयोजन दिनांक -९.८.२४विषय -काव्यविषय -घर की चौखट घर की चौखट हमारे लोक- लाज और सुरक्षा को समायेउठते हर कदम को सबके, दिशा जो दिखाये।। अआशा और निराशा में रौशनी जगमगाये।लौटते पथिक को अपने आगोश में बसाये।। जोड़ कर सारे रिश्ते घर की ज्योति जलाये।इस पार से उस पार तक…
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चौखट
मंच को नमन। लेखनी रचना का संसार दो दिवसीय आयोजन दिनांक -९.८.२४विषय -काव्यविषय -घर की चौखट घर की चौखट हमारे लोक- लाज और सुरक्षा को समायेउठते हर कदम को सबके दिशा जो दिखाये।। अशा और निराशा को रौशनी जो दिखाये।लौटते पथिक को अपने आगोश में बसाये।। जोड़ कर सारे रिश्ते घर की ज्योति जलाये।इस पार…
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नमन वीर जवानों को
[11/01, 03:37] Shama Sinha: ॐSAHIARRA. my native village has always quizzed by its name. Its sandhi vichched(sahi +arrah) made me think why it is named so and if it is correct it should have been more developed than the Arrah townAnyway it stands with the same status as before with innumerable memories making it SAHI…
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Reminiscing Sahiarra
[11/01, 03:37] Shama Sinha: ॐSAHIARRA. my native village has always quizzed by its name. Its sandhi vichched(sahi +arrah) made me think why it is named so and if it is correct it should have been more developed than the Arrah townAnyway it stands with the same status as before with innumerable memories making it SAHI…