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धरा
यह धरा नहीं ब्रम्ह तेजस्विता है अलौकिक इस की सहनशीलता है उपजती इसमें बस एक ममता है धर्म इसका बस देते जाना है ! आकाश इसका है एक प्रिय सखा सागर से लेकर है नीर-श्रृंगार आता तन मन पर इसके है बिखराता रंग बिरंगी चुनरी है पहनाता ! कली फूल और फल जब आते, खुशी…
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किताबें करती हैं बातें
“ज्ञान का हूं मैं ऐसाभंडार, देने को आई ज्ञान अपार! पास हमारे है ऐसा भंडार , पाता नहीं कोई मेरा सार! चार वेद औरअठारह पुराण , अठारह स्मृतियां और रामायण ! आरण्यक और उपनिषद ब्राह्मण, अनंत है इनके सूत्र परिमाण ! रूची जग गई मुझमें जिनकी, मिल गईं अक्षय उसको निधी! नाप सकता ना कोई…
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वसुंधरा
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दिल चाहता है
दिल चाहता है — जो भी चाहे मन,सब हो पूरा सपना कोई भी ना रहे अधूरा क्या कहूं,किसे ना गिनूं ख्वाहिशों में किसे मैं तजूं? दुनियां इतनी सुन्दर है कैसे! नभ में तारे चमकते हैं जैसे! चुनरी में जड़ कर श्रृंगार करूं ? या गूंथ कर अपनी पायल बनाऊं? ये सूरज जो मेरी बिन्दि बन…
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खाक मजा है जीने में
जीवन की शर्तें हैं अनगिनत कठिन मानना जिन्हे शत प्रतिशत ! श्वासों की गिनती होती है यहां, और मालूम नही मंजिल है कहां! उसे ही पता हम जन्मे क्यों, पर दिशा खोज में हम खोये यूं मृग बौराए अपने इर्द-गिर्द ज्यों सदा खुशामद में दौड़ लगाते शैशवकाल पार हम वृद्ध हो जाते! मील का पत्थर ढूढ़ने…