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रथ यात्रा
देेखो,चले हमारे कृष्ण ननिहाल !लेकर सबका स्नेह हजार !साथ में हैं बलदाऊ , सुभद्रा।उमंगअटूट हृदय सबके भरा। रथ खींच रही,भक्तन की भीड़ सारी,उमड़ा जन सैलाब, हृदय असुवन से भारी। “रह न जाना कान्हा, लौट घर जल्दीआना!बाट तकत दिन बीतेगा,सूनी होगी रैना! सूना होगा मंदिर, सूनी रहेगी नगरी!तुम रहोगे दूूर,तो कित बजेगी बांसुरी?” शमा सिन्हा20- 6…
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मां का परिवार
मेरा परिवार, मेरी ताकत! मेेरी आखें थी नींद से बोझिल,सामने पड़ी खुली किताब थी,सहसा स्नेह स्पर्श,नयन सजल,लेेकर बुलाने आई मेरी मां थी! “कल भी पर्चा देने भूखी ही गई थी।क्या यूहीं जगी आखों से रात काटोगी?चलो,साथ मिलकर दो कौर खालें!”पाकर स्नेह ,मन हुआ ममता के हवाले! वही है नींव,स्थिर चेतना शक्तिपीठ !हर परीक्षा में ,हर…
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जादू
किसे कहते हैं जादू ,विश्वास ही समझो, है इसकी परिभाषा! वस्तु हो जाए पल मे दृष्टि परे,मिट जाए पाने की आशा, आये होश तो ठिठक कर रहे हम कोना कोना खोजते! जैसे कोई हमारे हाथो से लेकर चला गया हो लपक के! ! अभी मैने देेखा उसे,सुना था उसकी आवाज पास ही गिरते! सोने की…
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“तुम बिन “
पंछी बन अकली,आसमान छानती हूं तुम्हे छोड़ कोई और नही चाहती जिसे हूं। दुनिया के मेले में,बस तुम्हें ही ढूँढ़ती हूं तुम्हे ना पाकर निर्रथक हो जाती हूं। जाने कैसा है यह विश्वास मोहन हर वक्त बैचैनी छाई हुई है आंगन,! जानती तुम्हे हूं बसे तुम हो कण कण ! इसी विश्वास से घिरी मैं…
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नन्ही कलियों से प्रश्न
सब्ज बाग की खिलती कलियों से मैनें पूछा यूं अचानक तुम सब अकेले आई कैसे आई? कल तक हर डाली थी विरान और खाली , अकस्मात कैसे मुस्काई तुम्हारी सब सहेली! सूना था बागीचा,टूटी थी किसलय की आशा जाने कैसे सुन ली तुमने मेरे मन की आकांक्षा! हर डाली पर गुलदस्ता बन छाई पल भर…
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तुम क्यों आते हो?
ऐ बादल तुम क्यों आते हो? नही बरसना तो क्यों छाते हो? ताकतवर इतने भी नही हो तुम! सूर्य अवहेलना नही कर सकते तुम ! चढ गये ऊंचाई आकाश की तो क्या! रवि किरणों का आक्रोश भूल गये क्या? तुम पले समुद्र की बांह-विशाल में थे कर आये,क्षीर- पान उसकी छाती से , फिर उड़े…