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क्या क्या दूं आशीष?
तुम्हीं बताओ बेटी मेरी, दूं तुम्हें क्या आशीष । तुमसे है आल्हादिनी सेवित धारा की कशिश।। कृतार्थ मन मेरा,नत्मस्तक चरणों में तेरे शीश। रुकती नहीं धारा ,भाव बहते बन अश्रू रंजीत।। प्रति-पल देती मुझेको छाया, बन वीरांगना नारी। मेरे कष्टों की जैसे तुम्हे मिली,ईश्वर से जिम्मेदारी।। कभी ना आस किया था, जायी बनेगी मेरी जननीं।…
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मां, दूं मैं तुम्हारा क्या परिचय?
“अमृतांजली” के लिए –तारीख:१४.२.२५विधि: कविताविषय -मां/ममताशीर्षक-“मां,तुम ही कहो!” मां तुम्हीं कहो,दूं क्या मैं तुम्हारा परिचय? मेरी ज़िन्दगी ने लिखा तेरे नाम हर विजय ।। रहता सजा हाथों में जिसके हैं अभयदान सदा।देख मुझको चिर उद्गमित होती उसकी ममता।। जानती नहीं तू रात और दिन कभी में कोई फर्क ।छुपा है तुम्हारे आदान-प्रदान में निश्छल प्रेम…
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बीते दिन महीने साल
बीतते जाते हैं दिन महीने साल देख सूरज को, हंस कर पूछा हाल बदल गए जीव संसार के सभी पर तनिक ना बदला तेरा दिवा काल! ज्यों का त्यों तू दौड़ रहा अपने पथ पर। हो अचम्भित,तुझको देख रहा है नर। तेरा चमकना नभ पर बना उसका काल स्वामित्व पाना चाहता, तुझको समेट कर! फ़ुरसत…
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दिन महीने साल
बीतते जाते हैं दिन महीने साल हंस कर देख सूरज से पूछा हाल बदल गए जीव संसार के सभी पर तनिक ना बदला तेरा हाल! ज्यों का त्यों तू दौड़ रहा पथ पर प्रेरित हो,तुझको देख रहा है नर यही बना है सहसा उसका काल स्वामित्व क्षितिज आकाश लेकर! फ़ुरसत नहीं चैन के पल दो…
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दिनकर भैया!
क्या कहकर मैं खुद को समझाऊं उन वादों को आज कैसे मैं दोहराऊं। त्योहार पर जब हम सब मिलते थे अश्रुजल से विदा आप हमें करते थे। अब कहो कौन वैसे हमें लौटायेगा? हम सबकी हौसला अफजाई करेगा? परिवार के दिनकर,भैया आप ही थे ! आपकी छाया हम भाई-बहन जीते थे! दे ना सकते हम…
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मंच को नमन।
महिला काव्य मंच रांचीतारीख -२०-१२-२४विषय -मां/ममताशीर्षक- मां तुम्हीं कहो,दूं क्या मैं तुम्हारा परिचय हमारी ज़िन्दगी ने लिखा तेरे नाम हर विजय । रहता सजा हाथों में जिसके हैं अभयदान सदा,देख मुझको चिर उद्गमित होती उसकी ममता! जानती नहीं तू रात और दिन कभी में कोई फर्क ,छुपा है तुम्हारे आदान-प्रदान में निश्छल प्रेम अर्क! आकांक्षाओं…