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पुनीत नींव निर्माण “
दीप जलाओ,नगर सजाओ,शुभ घड़ी ,पुनीत है त्योहार,उदित सूर्य कर रहा आलोकित ,अपने राम का दरबार। विशवास को मिला हमारे , अखंड अनोखा वह आधार ,सरयू तीर, विशाल विभूति,अपने राम का हो रहा त्योहार। सत्य सनातन वैदिक सपना, हिन्दुत्व हुआ आज साकार ,एक सूत्र बंध, करें प्रणाम अपने राम को हम बारम्बार। असाधारण यह मंडप ,…
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मिले मात-पिता दोबारा
“मिले मात-पिता दोबारा” जन्म क्रंदन उत्सव बना,सबने था खुशी से सुना,पुनःआजआवाज से मेरी, पिता ने कुशलता है बुना;आँगन में रहा न मेरे अब,छुपा कोई भी कोना सूना,आने से उनके ,बड़ी जिजीविषा जीवन की कई गुना ! शब्दो में भी दूर रहना अब उनसे, मै नहीं हूँ चाहती,आशीष में उनके, स्नेहपाश -आनंद नित हूँ भरमाती;अविरल मंगल…
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स्थिर चेतना
अच्छादित यह आकाश बरसता मुझसे कह रहाबहने दो थारा जीवन की जिस दिशा यह बह रहा विधि का विधान बना, सबको एक दिन पिघलनापंचतत्व की इस रचना को रंगहीन मिट्टी में मिलना अंतरमन की पूंजी हो हो या बहिर मन की हो भावनादान करो स्वेच्छा से सब, लेकर ना कुछ किसी को जाना …
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शूरवीरों को नमन
शूरवीरों को नमन! शक्ति स्तम्भ को देखना है जिन्हें,सशरीर चलते हुए, तो आकर,हमारे भारत की सीमा पर आपको देखले! वीर- रक्त सिन्चित संताने, पग-पग सचेत ध्वजा लिये! द्रृढता से जिनकी, पर्वत भी पाठ हैं नये नित सीख रहे ।, सागर के ज्वार भाटे नई ऊचाईयों को है ,निरंतर छूते! प्रशस्त लहरा रहा तिरंगा, हो आश्वस्त…
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चरैवेति चरैवेति
“चरैवेति चारैवेति” देखो,जनमानस में आई नई जागृतीचल पड़ी हैअब ,सूनी पड़ी सड़कें भीअर्थहीन बनी, COVID19 छाया भीनिर्भीक वज्र-हस्तआस की,है जगी। कई बार आये हैं, पहले भी विक्रांत बहाव,धीर-सहष्णुता ने डालने दिया न पड़ाव,ढीला न किया समाज ने साहसी कसाव,“विश्वास,बसंत आएगा”भर रहा है घाव। मनु -संतान भयभीत न कभी है हुई,,पहाड भी कदम न उसके रोक…