Category: Hindi Poetry

  • गीत –  ” सावन के झूले “

    गीत – “सावन के झूले” देखो सखि, अमवा तले पड़े झूले …२चलो सखी,नभ को हम उड़ कर छूलें…२ अम्मा बाबा से आस जुड़ी है हमारी,प्यारी यादों से भरी यह सुंदर सवारी!देखो सखि….चलो सखी…. रेशम के धागे में अपने सपने पिरो करसजाऊंगी सारे, मैं भैया की कलाई पर।देखो सखि…चलो सखी… पहनाकर भाभी को, चुनरी हरी बांदीनी,बनाऊंगी…

  • धानी

    नमन मंच।महिला काव्य मंच पश्चिमी रांची जिला इकाई।दिनांक -२३.७.२५विषय -धानीविधा -कविता धानी बरस रहा देखो झर झर पानीपसर रहा है रंग चहुंओर धानीकह रहा मोर,देख कर मोरनी,सुन कुछ बोल मेरे,ओ सजनी! देखो, छाए घने बादल काले,बरसा रहे बूंदन के फूल प्यारे!खेतों में सज रहे धानी नजारे,आओ सखी हम कजरी गायें! कहो मेहंदी से,रंगजाये धानी!रंगे सुहागिन…

  • भोलेनाथ

    मंच को नमन महिला काव्य मंच, पश्चिमी रांची जिला इकाई।विषय : भोले नाथविधा: कविता बड़े ही सरल प्रकृत है, हमारे भोलेनाथ,वादा है उनका, रहते वो सदा हमारे साथ। दरबार में उनके, उठाया जिसने है हाथ,बिन बोले सुनते हैं सबके मन की बात। जहां हो,वहीं से पुकारा है जिसने उनका नाम,बनता अगले पल ही है,सबके बिगड़े…

  • कहता है मन।

    दिनांक:-१४जुलाई२०२५शीर्षक:-“कहता है मन”विधा:- कविता “कहता है मन” कहता है मन, तुम हो यहीं ,सदा मेरे पास।मज़ाक में भी , दूर जाने का ना दो आभास! गुजर गए कई साल,यह होता नहीं विश्वास।पल पल जुड़ती रहती है कुछ वज़ह खास! भूलता नहीं कभी, तुम्हारा वह परिहासमज़ाक में तुम जब रोक लेते अपनी श्वास।। बेचैनी से मैं…

  • मौसम

    हवा ने कहा मैं चलूं जिधर से सहसा बदलूं मौसम मैं उधर के! ठहर जाऊं मैं जहां थोड़ी भी देर, मौसम विभाग के  लगते फेर! गर्मी से सब व्याकुल हो उठते पीकर जल तब ठंडक पहुंचाते। तपती गर्मी की धूप जब खाते । पहाड़ों की ओर दौड़ लगाते! भर कर पेड़ों को रसीले फलों से…

  • नव वर्ष बधाई

    भोजपुरी मानसरोवरतारीख: 29-3-25 “नव वर्ष बधाई” नव वर्ष मंगलमय हो सबका।आया शुभ महीना चैत्र का।प्रारंभ सप्तशती पाठ हुआ।जला,दीप मां अम्बिका का। बजने लगा घंटा मंदिर काआया जन्म दिन रघुवीर कादेवताओं ने किया पुष्प वर्षानवमी तिथी चैत्र मास का। मंगलमयी हो गयी अयोध्या।घर घर बजें पुनीत बधावा ।सजा महल दशरथनन्दन का।सजा सौभाग्य मां कौशल्या का। देखो…

  • धरती की क्रांति

    धरती विशेषांकतारीख १०.४.२५शीर्षक -“धरती की स्थिति” कैसे गिनाऊं कितनी है हमपर, धरती की कृपा?लेकिन अपने तत्वों से रच हमको, ओड़ ली व्यथा! अनगिनत सपनों का हमारे लेलिया जो उसने जिम्मा।स्वार्थ परायण मनुष्य ने बनाया उसे कहने को ही मां! छीन लिए अधिकार सारे,बांधा इच्छा के बंधन में।काट रहे उसके फेफड़ों को, घोप रहे मशीन सीने…

  • मंच को नमन।

    तारीख 10.4.25विषय – महावीरविधि -कविताशीर्षक -“वर्धमान स महावीर” महावीर ने बनाया  कीर्तिमान बिहार को।आये पवित्र करने इस पवित्र भूमि को।। माता त्रीशला ने देखे अनेक शुभ स्वप्न।ऊची हुई भविष्य वाणी,होगा समाज सम्पन्न। बरसा  सौभाग्य  असीम पिता सिद्धार्थ के मन।अंक सजा जब”कैवल्य” ज्ञानी वर्द्धमान का तन।। चैत्र शुक्ल त्रयोदशी को हुआ महावीर का जन्म।आये करने को…

  • हवा क्यों रही गुनगुना

    मानसरोवर काव्य मंचतारीख -९.४.२५शीर्षक -हवा क्यों गुनगुना रही हवा क्यों रही ऐसे गुनगुना?दे रहा पीड़ा यह पवन सूना।आये नहीं क्या बनाया बहाना?किससे बाटूं यह गीत,ओ सजना! मन में उमड़ रही आज अनेक बात ।कैसे पहुचाऊं उन्हें तुम्हारे पास।भेज रही लिखकर यह कोमल पात।चला रही लेखनी असुवन साथ। चाहती दिलाना याद वह चांदनी रात।अमृत वर्षा बटोरते…

  • “पत्र “

    मंच को नमन महिला काव्य- मंचपश्चिम रांची जिला इकाईतारीख -९.४.२५विषय -खत/संदेशा मन में उमड़ रही आज अनेक बात ।कैसे पहुचाऊं उन्हें तुम्हारे पास।भेज रही लिखकर यह कोमल पात।चला रही लेखनी असुवन साथ। चाहती दिलाना याद वह चांदनी रात।अमृत वर्षा बटोरते रहे अंजलि हाथ।बिना बोले हम सुना रहे थे बातें सात।कोयल की गूंज सहसा दे गई…