Category: Hindi Poetry
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मैं उकताने लगी हूं जिंदगी से
हो रहा मानव विकराल, लेकर अपनी भूख को। भूल गया है वह नैतिकता की सारी चौखट को।। दारू और व्यसन को खरीदा, देकर उसने ईमान। स्वदेश-सुखद-भविष्य का किया स्वयं देहावसान।। समाज को बढ़ते देख निघृष्ट अंधेरे दिशा में ऐसे। घिरी निराशा से,मैं उकताने लगी हूं ऐसी जिंदगी से ।। पचहत्तर साल की स्वतंत्र विधा ने…
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मौन
तेरी खामोशी में पा लेती हूं मैं अपने को, सुनती हूं वाचाल उन दबी इच्छाओं को! हुए बोल नहीं जिनके उच्चारित लेकिन , दृढ़ संकल्प का दिलाया तुमने मुझे यकीं! एक कवच पारदर्शी है बन जाता तुमसे , शब्दहीन अभिव्यक्ति पहुंचती आगे सबके! तू शांत होकर भी, ज्वालामुखी सी दीखती, ऐ मौन,तू है मेरी निशब्द प्रेरणा की…
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परेशानी
किसकी बात करें,किसको हम भूलें पेशानी पर छाई रहती सबकी लकीरें, हटा सकते नहीं हम सम्बन्ध का जाल मन के हर कोने ने रखा इनको पाल। किसी का आना हो,किसी का जाना अपेक्षित परिणाम की जगती है वासना शब्द के जाल बन जाते श्वासो पर फन्दे, माथे पर बूंदें उभरती हैं जब वो हैं गूंजते!…
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मैं उकताने लगी हूं
मैं,बार बार इस मन की पुकार सुनकर, हर पल इसकी तीव्रता पर पहरा देकर, हारी,इसको बांधने का अथक प्रयत्न कर, जीत जाता है यह हर प्रयास को लांघ कर ! पंख फैला उड़ जाता है मुझसे आंख चुरा कर, हाथों की पकड़ से निकलता फिसल कर ! रुकता नहीं ,कितना भी चाहूं बस में करना,…
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बेसन के लड्डू
घर का माहौल मिला जुला सा था। दिल्ली में इलाज के पश्चात,शुभा की मां एक रोज पहले घर वापस आ गई थीं। देखने में वे स्वस्थ दिख रही थी।सब आश्वस्त थे।किंतु डाक्टर के अनुसार,किडनी से जुड़े इलाज की प्रक्रिया जारी रखनी थी। रक्त आधान पिछले एक महीने से सफलता पूर्वक दिल्ली में चल रहा था।…
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मजदूर
चौराहे पर गाड़ी हमारी रुकी हुई थी हम अंदर बैठे, सपरिवार ठंडी हवा ले रही थीं खड़े ट्रक पर हमारे भवन की गिट्टी लदी थी उस पर एक मज़दूरिन,बदहवास पड़ी थी! “मई महीने की धूप फिर भी ऐसी नींद! अजब रचना है , गिट्टी भी नहीं जाती बींध!” मेरी बगल में बैठे मेरे पति ने…
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नृत्य
नभ पर बैठे गुरु, दे रहे संकल्प की थाप , भूल तत्व चेतना सत्य,नांच रहे हम-आप! समझे इस शरीर, इसके रिश्तों को अपना, मस्त किया माया ने,भूल गए क्या था करना! हारमोनियम स्वरों सी,जगी असंख्य इच्छायें, तबले की थाप सी, इंगित हुईं प्रबल इच्छायें! फिर कैसा नृत्य किया मानव ने कैसे मैं बताऊं ? भूला वह…
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जीने लगे हैं अब
कहना है उनका एक बहुत ही पुराना लेकर आता है समय नित नूतन बहाना कभी टूट गया था जो मेरा सपना पुराना आज फिर जिंदा हो गया है वो याराना! हाथ थामने की करने लगा है जिद अब झटक कर दामन मेरा,चला गया था तब रख कर उंगली चुप कर रहा मेरे लब, जीने को…
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चुनाव
“चुनाव “ मौसम पूर्वानुमान भी छूट रहा है बहुत पीछे, नेता के भाषण प्रतिस्पर्धी फरीश्त बिछा रहे । रिझाने को वादा,आसमान ज़मीं पर लाने का करते, असम्भव को बातों ही बातों में पूरा कर जाते ! क्यों भूलते हैं षडयंत्रकारी!आया है अब युग राम का! असत्य हटा कर अब सर्वत्र “आयुध “हीआसीन होगा! आत्म-जागरण…
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चुनाव
मौसम पूर्वानुमान भी छूटता है पीछे, नेता के भाषण जब फरीश्त बिछाते। रिझाने को,आसमान ज़मीं पर लाते, असम्भव को बातों में पूरा कर जाते ! भूल जाते हैं, आया है अब युग राम का! असत्य हटा कर अब सत्य हीआसीन होगा! आत्म-जागरण करेगी सरयू मंदाकिनी गंगा योगी-सुमति सिद्ध करेंगे महत्व चित्रकूट का! चंचल आज विशाल…