Category: Hindi Poetry

  • इंसान में इंसानियत

    अरे, यह क्या हुआ बिखर गया है क्यों समाज धन की लोलुपता छोड़ कुछ नजर ना आता आज! नदी किनारे संयुक्त हुआ था करने को नेक काज टुकड़ों मे है बिखर गया कहलाया था जो समाज ! कहां बह गई वह टोली,गढित वह स्वर्णिम सभ्यता, लुप्त हुई मिठास दोस्ती की, अदृश्य हुई मानवता ! वह…

  • रामायण काव्य महत्व

    “रामायण की महत्ता” रामायण काव्य नही अपितु आदर्श संहिता हैं।समाज के प्रत्येक क्षेत्र के वर्णन के साथ, गुरु, माता ,पिता,स्त्री-पुरुष, भाई,मित्र,सेेवक यहा तक की दुश्मन की महत्ता का नाम रामायण है। नीतीपूर्ण जीवन के संदर्भ में समसामयिक घटनाओं का किस प्रकार आदर्श सामाजिक संयोजन होना चाहिए, इसी का वर्णन बालमीकी मुनी और तुलसीदास ने किया…

  • हमारे गांधी

    हिला दिया उसने,प्रवासीय प्रशासन विधी! लूट लिया तर्कों से अपने ब्रिटिश सरकार की गद्दी! वह क्रमचंद-पुतली बाई का था अनोखा सपूत! दो अक्टूबर 1869का दैवीय आनंदकोष अटूट! वह विलक्षण बालक बना हमारा महात्मा गांधी! अहिंसा के साथ चलाई जिस ने हिन्द राष्ट्रवाद की आंधी! पाकर संदेश मांगा जगत ने अपना नागरिक अधिकार ! नेतृत्व में,…

  • रामायण

    “रामायण की महत्ता” रामायण काव्य नही अपितु आदर्श संहिता हैं।समाज के प्रत्येक क्षेत्र के वर्णन के साथ, गुरु, माता ,पिता,स्त्री-पुरुष, भाई,मित्र,सेेवक यहा तक की दुश्मन की महत्ता का नाम रामायण है। नीतीपूर्ण जीवन के संदर्भ में समसामयिक घटनाओं का किस प्रकार आदर्श सामाजिक संयोजन होना चाहिए, इसी का वर्णन बालमीकी मुनी और तुलसीदास ने किया…

  • “ऐ मन!”

    रखना ऐ मन,पास अपने बस कुछ ही यादें! ठहरी हैं जिनमें खुशी की वो कोमल सम्वादें! बाकी सब कर देना विस्मृति के अंक सुपुर्द ! मिटाकर उनकी आकृति,उनका सारा वजूद! बस एक बात गांंठ बांध कर रख लेना तुम ! चुभ गया हो नश्तर अगर, मिटाना उनका वहम! खोल चिलमन,उड़ा देना हवा में सारे रंजो-गम!…

  • Bihar ke veer Putra

    हौसला वीरों का मुरझाता नही शरीर की कमजोरी से थक कर वीर कभी रुुकता नही, दुश्मन कीललकार से सन सन्तावन के योद्धा,बन,वीर कुंवर सिंह हुये खङे ! अस्सी साल की उम्र में,उठा तलवार अंग्रेजों से भिड़े! बन कर मां का रक्षक,उतरा जब कुंवर जगदीशपुुर में हारीअंग्रेजों की फौज ,1857सिपाही विद्रोह रोकने में! गोलियां बरस रही…

  • करवाचौथ

    स्नेहमय रंजित अनुपम यह है त्योहारभरा जिस में त्याग- समर्पण- प्यार । पंच तत्व विकसित, दो आत्मा हैं समर्पित,जैसे यह धरती और चंद्रमा इकदूजे को अर्पित! कार्तिक माह के चौथे दिवस को चांदनी बिखेरताआता चांद लेकर तारो जड़ी चमकती चुनरी! अंंजली से पुष्प, पत्र, और जल कर अर्पणहो जाती तृप्त नारी पाकर प्रेम सजन! सफल…

  • सफर

    अच्छा लगता हमें साथ सफर करना, अगर मकसद हो एक ,एक सोच उमंग की परिभाषा भी है सहजता हर छोटी बात पर लगता है ठहाका! बिसरी बात को बार बार दोहराना! सहजता से मन की बात कह डालना!!

  • Guru Govind Singh

    सिक्खों के हुये नायक ,मां भारती के सुपुत्र । रक्षक बने पाकर,नौवें वर्ष में राज पाठ कासूत्र! नौवें गुरू पिता इनके,जिनसे स्थापित हुआ धर्म ! समाज का देकर नेतृत्व दिखाए उनहोने सुकर्म । यौवन के पूर्व ही बन गये रक्षक नव भारत के! मुगलों से लिया टक्कर,दिखाई वीरता सिद्ध कर के! पगड़ी की लाज बचाई,मां…