Category: Hindi Poetry
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शबरी के राम
आयेंगे राम एक दिन
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Bharat Diwas
जाग गया है भारत अब, देख रहा संसार सिर उठाकर! गुंंज रहा इतिहास, ऊंंची तान में उपलब्धी सुुन कर! गण-तंत्र बन गया,लोक-आधार स्वराज्य भारती का! छू रही यहां नारी,आकाश की उचाई सूर्य-चंद्रअंबर का! रखा समृद्धी काआधार मर्यादा पुरुषोत्तम ने तीन रंग ! नारंंगी-श्वेत-हरा बने गुण त्याग पवित्रता सम्रिद्धी के संग! अधिकार और कर्तव्य में प्रत्येक…
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“अपने मन को मत मारो!”
दर्शन कर लो राम लला का,भर लो अपनी झोली अपने मन को मत मारो,कह रही उल्लासित टोली! हृदय उद्गारों को साझा कर छिड़को प्रीत की रोली!¡ त्रेता सियाराम खेलेंगे द्वापर राधाकृष्ण संग होली ! आस आज हुई पूर्ण वैैभब पूर्ण होगई अयोध्या नगरी! थिरके केवट हनुमान विभीषण,कोयल बागों में चहकी! करने को अभिनंदन रघुुवर का…
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“नियती ने युग पलटा”/”अदभुत अलौकिक अनुपम “
यह कैसी मधुर घड़ी है आई!चहुं ओर कौतुहलता है छाई!यह शहनाई पवन ने है गुंजाई!सवारी राम लला की पधराई! कभी संसार ने,सोचा ना था !भक्त का भगवा लहरायेगा!अटल धैर्यअकेला,टक्कर लेगा!राम का मंदिर भव्य बन जायेगा! जिसका शिल्पकार हो महर्षि!जिसके धन हों विश्व सत्यार्थी!लग्न लगाए है गतिरत भागीरथी!सेवक हैं जिनके पवनपुत्र रथी! सम्भव सबकुछ मनोबल से…
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“रघुवर को सिया पत्र!
मेरे रघुवर,आपको निवेदन है,सिया का प्रणाम !“सिया-राम” की इस जोड़ी का बनाये रखना आयाम! मात पिता के वचनों का पालन हमने साथ निभाया!सभी आदर्शो को प्रजा-राज्य सुख-आधार बनाया! संकट में सत्य-समर्पित व्यवहार हमने निभाया!भ्रात-सहिष्णुता ,सेवक के प्रति प्रेमधर्म अपनाया! बना रहे मधु-रस रजिंत यूंही समाज का हर नाता!ज्योति अखंड कर्तव्यनिष्ठा की,भारत रहे करता! यूंही बनी…
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राम आये घर
राम के आगमन को देख रहा सारा संसार! पाकर झलक लला की होंगे सब भवसागर पार! उठा नही खंजर कोई गूंजी नही कोई शंख नाद। भक्ति , विश्वास और धैर्य ने बिछा दिया विजय फूल ! सरयु तट ने किया परिभाषित, राम लला निज धाम! न्याय ने सहर्ष स्वीकारा”स्कनद-पुराण” कौशल प्रमाण! ब्रम्हा-विष्णु-रुद्रत्रीदेव को अर्पित देव-नगर”ग्रहमंजरी!”…
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शबरी के राम
मंच को नमन। मानसरोवर साहित्य अकादमिदैनिक प्रतियोगिताविषय- “शबरी के राम “विधा-कवितादिनांक- 18-1-24 शबरी के राम रघुुवर की भक्ति करती,श्रमणा बन गई शबरी!भीलकुंवर की बनी पत्नि!भील सरपंच की बेटी! साथी मन ना पहचाना,भायी नही उसे,ऐसी भक्ति! स्वीकार भीलनी ने किया नियती की थी यही मति! छोड़ शबरी को बीहड़ वन में,वह गया देने जीव बली !…
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“मुझे भी नही आता!”
बेटे बहू के घर से बहुुत हड़बड़ाहट हम में चले थे! तैयारी लौटने की विदेश से,पूरी थी पहुंचने केपहले ! किन्तु बहु की इच्छा थी कुछ विशेेष शगुन उठाने की कोई बड़ा ना था,मौका भी था और उसकी मर्जी थी! बेटे ने हवाई जहाज में यात्रा के नियम समझाये। पोते-पोती से हमने भी प्रेेम-भाव बहुत…
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गुरू गोविंद सिंह
“गुरू गोविंद सिंह” सिक्खों के हुये नायक ,मां भारती के गोविंंद बने वीर सुपुत्र ।यशस्वी बन गये पाकर,नौवें वर्ष ही में राज पाठ कासूत्र! पिता इनके नौवें गुरू तेग बहादुर !जिनसे स्थापित हुआ सिख धर्म!समाज की देकर जिम्मेदारी,नेतृत्व दिखाए उन्होंने सुकर्म ! यौवन के पूर्व ही बन गये गोविंद रक्षक नव भारत सीमा के!मुगलों से…
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“रामु सिया सोभा”
प्रकट भये त्रैलोकपति श्री विष्णु और नारायणी! आसीन हुये सबके हृदय,बने धर्मयुक्त नर-नारी! वाटिका में जानकी ने सहसा देखा रघुवर श्रीराम। मन वही रह गया जानकी का ,चरणों में मिला धाम ! स्वयंवर आये अनेक राजा और लंंकापति नृप-श्रेष्ठ। शिव धनुष “पिनाक” हिला नही,प्रयास हुआ निश्चेष्ट ! ब्रम्हा-विष्णु-महेश रचित विधान,संकट से घिरा रावण हरि हाथों…