Category: Hindi Poetry
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“लगन तुमसे लगा बैठे “
मानसरोवर साहित्य अकादमीभोर सुमिरनदिनांक ३.४.२५प्रदत्त विषय – लगन तुमसे लगा बैठे लगन तुमसे लगा बैठे बेखबर हम कृष्ण।चले ढूंढते तुम को कुंज की हर शाख तृण।। देख वृक्ष से लटका वह तुम्हारा पीताम्बर ।मस्ती में लगी डोलने, उसकी बन मै चंवर।। छेड़ दी मोहन तुमने यह कैसी चाहत की धुन।खोकर सुध मैं लगी थिरकने, तुम्हारी…
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नव वर्ष बधाई
नमन मंच को भोजपुरी मानसरोवरतारीख: 29-3-25 “नव वर्ष बधाई” नव वर्ष मंगलमय हो सबका।आया शुभ महीना चैत्र का।प्रारंभ सप्तशती पाठ हुआ।जला,दीप मां अम्बिका का। बजने लगा घंटा मंदिर काआया जन्म दिन रघुवीर कादेवताओं ने किया पुष्प वर्षानवमी तिथी चैत्र मास का। मंगलमयी हो गयी अयोध्या।घर घर बजें पुनीत बधावा ।सजा महल दशरथनन्दन का।सजा सौभाग्य मां…
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आज की मीरा
“आज की मीरा” नहीं कहने को बचा था,उसके पास एक तारे की बात।ना वह नाच सकती थी, लेकर भजन भक्तिको साथ । प्रयत्न कर वह सुर योग की, कुछ बुन लेती आज।प्रशिक्षण लिया ध्यान लगाना, मध्यम धुन साज। गोद बिठाया बाल कृष्ण को निर्मलताके साथ।मन ही मन करती उनसे अपनी कई सारी बात। तोड़…
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सद्कर्म ही मेरे जीवन की पूंजी है।
हिन्दी सृजन सागरदैनिक प्रतियोगिताविषय:सत्कर्म ही मेरे जीवन की पूंजी हैतिथि २५.३.२५ सत्कर्म ही ही मेरे जीवन की पूंजी है। लेकर जिस को उड़ता प्रारब्ध पंछी है। देन लेन का काम सब इसके जिम्मे है। अपने बस में बस यही एक कृत कर्म है। समर्थ मनुष्य भी, कुछ और ढोल पाता है। अन्त समय दोनों हाथ…
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गुनगुना रही है ज़िन्दगी
गीत नया गुनगुना रही है ज़िन्दगी । खुल रही बात बहुत जिसमें अनसुनी । पुरानी वो उलझनें सारी सुलझ रही। सनातन तत्व की तस्वीर नई बन रही। खेल पर किस्मत के पहले रोती थी। नसीहतों से बहुत दूर मैं भागती थी। क्यों होता है ऐसा, मैं उलझ जाती थी। कैसे बदलू सबको,समझ ना पाती थी।…
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अमर शहीद
नमन मंच मानसरोवर काव्य मंचविषय-अमर शहीद भगत सिंह, राजगुरू, सुखदेवविधा-कवितातिथि -२३-३-२५शीर्षक -अमर शहीद “अमर शहीद ” लिख कर लाल लकीरों से कहानी,कर दिया वतन के नाम ज़िन्दगी अनगिनत ने जिया ऐसी जवानी ।धैर्य को बनाकर अपनी रवानी! सुनकर हिंद के वीरपथिको की कथा,बह पड़ा काजल बन, मां की व्यथा । गिन नहीं पाएंगे कितने…
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उन्हें क्या
समझदार है पर कुछ भी कह जाते हैं दर्द दिल का वो कभी ना समझ पाते हैं हैं वो बुजुर्ग लेकिन उनमें समझ नहीं उनके सुझाव मुझे कितना तड़पाते हैं। वो क्या जाने कैसे बनाया घरौंदा हमने उनको चांदी की चम्मच मिली खाने में मैंने कैसे ईंट जोड़ बनाया घोंसले को मिलाया कैसे सीमेंट बालू…
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बस इतना बता दो
तुम आओ ना आओ, मुझे बस,इतना बता दो राज़ पुराना खोल कर कहो। बांधा क्यों इतना गहरा बंधन बन गये तुम श्वासो का स्पंदन! भारी बना है जीवन हर दिन, कांटे ना कटती, लम्बे पल-छिन! समय बना है,अनसुलझा रिण विचित्र विचारों से घिरा यह मन। ऐसा क्या कर्म किया मैंने गहन अंधेरा छाया घर में…
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नमन मंच
मानसरोवर काव्य मंचदिनांक -१७-३-२५शीर्षक -“तुमको लगता है कि”विधा- गीत “तुम को लगता है….” तुम को लगता है कि तुम मुझसे जीत गये .फक्र हमें हैं,मुस्कान पर तेरे दिल हार गए ।तुमको लगता …. तुम इसे जीत समझकर गुमान करते हो.तेरी मुस्कान का सौदा हम इससे करते हैं ।तुमको लगता है … तेरा रुठना भी हमें…
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तुम को लगता है…
मानसरोवर काव्य मंचदिनांक -१७-३-२५शीर्षक -“तुमको लगता है कि”विधा- गीत “तुम को लगता है….” तुम को लगता है कि तुम मुझसे जीत गये .और हम हैं कि तेरी मुस्कान पर दिल हार गए ।तुमको लगता …. तुम इसे जीत समझकर गुमान करते हो.तेरी मुस्कान से इसका सौदा हम करते हैं ।तुमको लगता है … तेरा…