Category: Hindi Poetry
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“अपनी वाली होली”
“मैं ढूंढ रही अपनी वाली होली!” कहां छुुप गई वो रंंगीली प्यारी होली,आती जो बन अपनी, लेकर संग हुल्लड भरी बाल्टी , लाल- हरी नटखट सजनी? हमें भुलाने , मां हाथों में रखती,दस पैसे वाली पुड़िया कई, अबरक चूर्ण मिलकर जो बन जाता,चमकता रंग पक्का सही! हम शातिर बन इकट्ठा करते, बाजार में आई नई…
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वर्षा ऋतु
भगाने को जेठ की चिलचिलाती धूप वर्षा ऋतु लाती श्रावण -भाद्रपद बंदूक प्यासी धरती की सुनकर ऊंचीपुकार आकाश चट पहन लेता इंद्रधनुषी हार! आती हवा सागर की लहरे अथाह बटोर, पिघलती पर्वत पर बर्फ की शिलायें कठोर ! उफनती नदियां,भरते पोखर तालाब , बच्चे खेलते कूद कूद पानी में छपाक! बादल संग जोआतीं बारिश की…
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“धनतेरस “
आओ देव धन्वन्तरि को करें संतुष्ट स्वस्थ रहे तन,विवेक हमारा हो पुष्ट ! सरस्वती का सहर्ष करें आवाह्न, स्वतः विराजेंंगी तब लक्ष्मी कमलासन! घर घर नित पायेगा कृपा नारायण, पधारेंगें द्वार सिया-रघुुवर -लक्षमण! अयोध्या बसेगी हमारे शुुभ आंगन , समृद्धी से होगा,आलोकित हर प्रांगण ! धनतेरस की अनेक शुभ कामना! शमा सिन्हारांची10-11-23
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माता लक्ष्मी
“माता लक्ष्मी” जहां सरस्वति बनती अग्रणी, स्थाई बसती वहीं सदा लक्ष्मी! ज्ञानदीप को प्रज्ज्वलित कर, पनपाति विष्णुप्रिय दामिनी! कारण छिपा ,एक अति गहरा, श्रम में है चिर ज्ञान पनपता ! खेत खलिहान स्वर्णउपजता, अनुकूल बीज जबश्रमिक है बोता! बिन विद्या, कला नही निखरती, ज्ञान बिना व्यर्थ जाती हरशक्ति! विद्या विरााट देती स्थिर समृद्धी, लक्ष्मी जिसके…
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“भैया दूज”
बचपन की कुछ प्यारी यादें,आज आप सेकरती हूं साझा। जीवन होता था सरल बहुत तब,पारदर्शी थी व्यव्हारिकता ! परिवार हमारा साथ मनाता त्योहार मनाता,एक ही आँगन में जुट, सबको यही चिंता रहती,कोई भाई बहन ना जाए खुशी में छूट! भाई दूज पर बनता पीठा-चटनी,फुआ बताती बासी खाने की रीती चना दाल की पूड़ी, खीर, आलू-टमाटर-बैगन-बड़ी…
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“प्रेेम भैया को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनायें”
भेेज रही भैया आपको,जन्म दिन की ढेरों शुभ कामनायें!
स्वस्थ-प्रसन्न-सुखीऔर संतुष्ट आप सदा सपरिवार रहें!
आज भी याद हैं वो बचपन के प्यारे साथ बिताए लम्हें,
वो सफर कुुछ बड़ों केसाथ, जीप से किया था हम सबने।
मीठी हवा संग,”हरपुर-लौक”खोजती,
जीप चल रही थी दौड़ कर!
जुटे हुए “ट्रेलर” पर थे हीरो बने,आप दोनों और भैया शशीकर!
व्यस्त थे आप, देने में स्टाईल, देवानंद और शरीर कपूर से लेकर!
पण्डित कृपाल पाड़ें साध रहे हमपर ,अपना कड़क हुक्म थे इधर!
कान्वेंट में पढ़ते बच्चों पर मिली थी जो, करने को अगुआई,
अपना अंग्रेजी भाषा ज्ञान दिखाने की राह सीधी उन्हें दी दिखाई!
“इट ईज भेरी कोल्ड “,फिर लगे बाकी भूले शब्द खोजने,
“पलीज भियर युओर स्विटर्ज “कह बड़े गर्व से लगे हंसने!
उनके इस कोशिश पर हम बहने भी ना रह सके धैर्यपूर्वक चुप,
खि! खि! खि !खि! कर अचानक, जोर से खिलखिला पड़े हम सब!
अचानक अपनी ओर, चार आंंखें गम्भीर मिली, हमें घूरती,
ऐसे में अपनी हंसी दबायें कैसे, सिट्टि-पिट्टी हमारी गुम थी!
हीरो सी हरकत करने में, आप दोनों रहे ,अधिक मग्न और मस्त,
इधर हमें पण्डित जी की अंग्रेज़ी कर रही थी बहुत त्रस्त!
फिर भी वह धूल भरा रास्ता, मस्त-मोहक रहा हैआज तक!
अचानक “भी भिल रिच यूूर भिलेज!” सुन आप भी हंस पड़े!
हम बहनों को मिली छूट! देर तक हंसी-ठहाकों में लोटते रहे!
फिर भी वह धूल भरा रास्ता,मस्त-मोहक बना रहा हैआज तक।
कामना यही,उस प्यारे-अनुभव-बंधन-वृक्ष को,”हरि” हरित रखें युगों तक !
शमा सिन्हा
5-11-23“प्रेेम भैया को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनायें” भेेज रही भैया आपको,जन्म दिन की ढेरों शुभ कामनायें! स्वस्थ-प्रसन्न-सुखीऔर संतुष्ट आप सदा सपरिवार रहें! आज भी याद हैं वो बचपन के प्यारे साथ बिताए लम्हें, वो सफर कुुछ बड़ों केसाथ, जीप से किया था हम सबने। मीठी हवा संग,”हरपुर-लौक”खोजती,जीप चल रही थी दौड़ कर! जुटे हुए “ट्रेलर”…
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करवाचौथ
स्नेहमय रंजित अनुपम यह है त्योहारभरा जिस में त्याग- समर्पण- प्यार । पंच तत्व विकसित, दो आत्मा हैं समर्पित,जैसे यह धरती और चंद्रमा इकदूजे को अर्पित! कार्तिक माह के चौथे दिवस को चांदनी बिखेरताआता चांद लेकर तारो जड़ी चमकती चुनरी! अंंजली से पुष्प, पत्र, और जल कर अर्पणहो जाती तृप्त नारी पाकर प्रेम सजन! सफल…
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“अकेलापन “
“अकेलापन “ खुद को अन्तर्मन से जो मिलवाये,अनुभवों को सुलझा कर समझाये,लेेकर भूली बिसरी याद जो आ जाए,मिठास भरा अपनापन दे जाये,कितना प्यार भरा इसमें,कैसे समझाएं?वक्त के घावों को धीरे से सहज सहलाये!अपनों की कद्र, परायों का मान बढ़ाये!जंग जीतने के कई रहस्य हमें समझाए !हार को हटा,जिन्दादिली भर जाये!स्वाभिमान भरा अनेक नई राह दिखाए!भरकर…
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“जरा बचके!”
हुआ समय मिलन सूर्य -संध्या का,तारों को बांंहों में समेट,छा रहा अंधेरा।“जरा बचके रखना कदम मेरे सजना!”दे रहा आवाज, दूूर से मल्लाह नांव का। पता नही है दूर कितना अपना वह किनाराभला यही,मध्यम धारा के संग बहते रहना!“जरा बचके दूर,नदी के भंवर से रहना!पतवार पकड़,दिवास्वप्न में तुम ना खोजाना!” यह सफर है,बस हिसाब लेन-देन का,“जरा…
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Forwarded/4.9.23
..┍──━────┙◆┕──━────┑✮ ~ स्टेट बैंक की कहानी ~ ✮┕──━────┑◆┍──━────┙ज़रूरी नहीं किपापों के प्रायश्चित के लिएदान पुण्य ही किया जाए. स्टेट बैंक में खाता खुलवा कर भीप्रायश्चित किया जा सकता है. छोटा-मोटा पाप हो, तो बैलेंस पता करने चले जाएँ. चार काउन्टर पर धक्के खाने के बादपता चलता है, किबैलेंस …. गुप्ता मैडम बताएगी. गुप्ता मैडम का…