Category: Hindi Poetry

  • ऋतुु-राज बसंत

    ओऊम। प्रिय पाई,एक स्वरचित कविता भेज रही। शायद यह तुम्हारे काम आये। बसंत ऋतु फाल्गुन और चैत्र दो महीने रहता है।फाल्गुन, वर्ष का अंतिम माह है और चैत्र वर्ष का प्रथम माह।बसंत से हिंदू वर्ष आरंभ भी होता है और शुरू भी।इसीलिए बसंत ऋतु के वर्णन में दोनों को सम्मिलित किए हैं।मां “ऋतुओं का राजा…

  • करते क्यों हम प्रार्थना

    नाम हम लेंगें जब लगातार कभी तो आयेंगें वो थक हार! कर ना सकेंगे वो कोई बहाना, ना देख सकेंगे भक्त का रोना! इसलिए ही हम पुकारते लगातार ! कुंती ने यही कृपा चाहा एक बार कृृष्णजा रहे, हस्तिनापुर के उस पार । क्फफ मेरे धीरज को तोड़ेंगे कितनी बार

  • जुनून

    नशा सा उसपर हर पल छाया है रहता ,किनारा बहुत पास है उसे यूं लगता,हवा में वह अनेक लकीरें यूं डालता ,जैसेअपने सपनों के महल काआकार हो खींचता! कहते हैं सब, वह अब होश में नही रहता,कभी किताब कभी प्रयोगों की बांतें करता,आकांक्षी है वह नभ से भी ऊचें पर्वत का,उसकी सांसों में है जुनून…

  • “गिले शिकवे”

    मेरा छूट गया लम्बा उससे था साथ,जुड़ा था जीवन पल पल जिसके पात,छुड़ा कर चला गया अचानक वह हाथ,लेकर संग, गिले शिकवे की सौगात ! होती थी शिकायत जब कोई था सुनता,मेरे मन की आहट को वह पल पल पढता,आंचल मे चाहतों की खुशियां था भरता,हर पल इर्द-गिर्द था साया उसका रहता! दूरी उनसे बन…

  • मिलने से डरता हूं

    दिन अनेक बीत गये मेरे वादे को रहा नही कोई कहाना कहने को ना है हिम्मत ही सच्चाई बंया करने को टूूट ना जाये शीशा,थमाया जो हांथों को। दू क्या साक्ष्‌य सच्चाई बताने को, उनके पास है वजह मुझसे रूठने को वो आये होसले से मिलने मुझसे मिलने को, पुरानी याद नहीं काफी सुलझाने को!…

  • “मिलने से डरता हूं!”

    कई दिन बीत गए निभाया नही वादे को,रहा नही कोई बहाना अब उनसे कहने को,उनके जुनून के आगे हिम्मत नही बयां करने को,डर है टूटे ना शीशा,थमाया उन्होने जो मुझको! दूं क्या साक्ष्य उन्हे सच्चाई समझाने को?पास है उनके वजह अनेक,मुझसे रुठने को,वो आये थे बहुत हौसले से ,मुझसे मिलने को,यादों का वास्ता है नही…

  • “मोक्ष और मुक्ति”

    ना चाहिए मुझे तुमसे अब ,मोक्ष !और ना चाहिए तुमसे कोई मुक्ति!देना ही है तुम्हे तो दे दो ऐसी भक्ति,अपने चरणों की कृष्ण तुम आसक्ति! किसी और को अब नही है पाना,सारी चेतना तुम में समाहृत जाना!बिनती एक,जब भी बुुलाऊआना,तुमसे ना है मुझे कुछ और मांगना! हर उपलब्धी है तुम में ही समाई,गवांयां है मैने…

  • “श्रावणी रास “

    रास रचाने गोपी संग,आकाश विशाल पर छाये! सुन कर रुक गई हवा, कृष्ण जो अपनी बंसी बजाये, श्यामल रंग भर गई फिजा,पुनः वृंदावन रास रचाये! हर एक घटा संग नाचे माधव,सबका मन भरमाये, धन्य हुईं सब बालायें,केशव जब लगे उन्हें नचाने ! लगी बरसने मधु-चांदनी, नव धारा अमृत की बहने, खिली पुष्प कलियां सतरंगी, रात…

  • अहंकार

    अहंकार आत्म हनन कर उगता चित्त में जो विचार ,पंच तत्व काया समझता मानव जीवन-सार,विस्मृृत चेतना कर जब जीवन उलझता माया जाल,बन्धन से तब बांध लेता अहंकार का काल! शमा सिन्हा30 -6 -23

  • “मौन”

    मौन में होता है सन्निहित उत्तर, उठते हर प्रश्नका! जीवन की सभी परिस्थिति,हर तूफान का! छिपि है इसमें शक्ति अपरिमित ,तेज धैर्य का! बोल से ज्यादा अभिव्यक्ति,शौर्य सहनशीलता का! मौन सूचक है, अंतरनमन स्वाभिमान की पराकाष्ठा का! है प्रकाश-ध्वजा अजय यह,आकाश से ऊँचा मनोबल का! शब्द हीन होकर भी विस्मित अभिव्यक्ति है यह स्वमत का!…