Category: Hindi Poetry
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अबकी होली न भाई!
लो होली इस बार भी है आई अनगिनत सपने यह दोहराई। क्या कहूं क्या कारण है बनाई जाने क्यों मन को यह ना भाई। । याद बचपन की अनेक उमड़ी, लेकर पिचकारी और रंग बाल्टी पैरों में हवा ने जैसे मेहंदी लगाई, मैं उस टोली से जा मिल आई। हुड़दंग मचाती टोली में खोई पकवान…
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Thanking You is not Easy
It’s not at all easy to thank You! innumerable requests in queue. Time and again more added anew Each with an emergency in view! exceptional power,reliable support! You, the only solution for me to hold More valuable than any other gold! Life ‘s experience manyfold told! There’s none on whom the soul can count In…
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क्या क्या दूं आशीष?
तुम्हीं बताओ बेटी मेरी, दूं तुम्हें क्या आशीष । तुमसे है आल्हादिनी सेवित धारा की कशिश।। कृतार्थ मन मेरा,नत्मस्तक चरणों में तेरे शीश। रुकती नहीं धारा ,भाव बहते बन अश्रू रंजीत।। प्रति-पल देती मुझेको छाया, बन वीरांगना नारी। मेरे कष्टों की जैसे तुम्हे मिली,ईश्वर से जिम्मेदारी।। कभी ना आस किया था, जायी बनेगी मेरी जननीं।…
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मां, दूं मैं तुम्हारा क्या परिचय?
“अमृतांजली” के लिए –तारीख:१४.२.२५विधि: कविताविषय -मां/ममताशीर्षक-“मां,तुम ही कहो!” मां तुम्हीं कहो,दूं क्या मैं तुम्हारा परिचय? मेरी ज़िन्दगी ने लिखा तेरे नाम हर विजय ।। रहता सजा हाथों में जिसके हैं अभयदान सदा।देख मुझको चिर उद्गमित होती उसकी ममता।। जानती नहीं तू रात और दिन कभी में कोई फर्क ।छुपा है तुम्हारे आदान-प्रदान में निश्छल प्रेम…
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बीते दिन महीने साल
बीतते जाते हैं दिन महीने साल देख सूरज को, हंस कर पूछा हाल बदल गए जीव संसार के सभी पर तनिक ना बदला तेरा दिवा काल! ज्यों का त्यों तू दौड़ रहा अपने पथ पर। हो अचम्भित,तुझको देख रहा है नर। तेरा चमकना नभ पर बना उसका काल स्वामित्व पाना चाहता, तुझको समेट कर! फ़ुरसत…
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दिन महीने साल
बीतते जाते हैं दिन महीने साल हंस कर देख सूरज से पूछा हाल बदल गए जीव संसार के सभी पर तनिक ना बदला तेरा हाल! ज्यों का त्यों तू दौड़ रहा पथ पर प्रेरित हो,तुझको देख रहा है नर यही बना है सहसा उसका काल स्वामित्व क्षितिज आकाश लेकर! फ़ुरसत नहीं चैन के पल दो…
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दिनकर भैया!
क्या कहकर मैं खुद को समझाऊं उन वादों को आज कैसे मैं दोहराऊं। त्योहार पर जब हम सब मिलते थे अश्रुजल से विदा आप हमें करते थे। अब कहो कौन वैसे हमें लौटायेगा? हम सबकी हौसला अफजाई करेगा? परिवार के दिनकर,भैया आप ही थे ! आपकी छाया हम भाई-बहन जीते थे! दे ना सकते हम…
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मंच को नमन।
महिला काव्य मंच रांचीतारीख -२०-१२-२४विषय -मां/ममताशीर्षक- मां तुम्हीं कहो,दूं क्या मैं तुम्हारा परिचय हमारी ज़िन्दगी ने लिखा तेरे नाम हर विजय । रहता सजा हाथों में जिसके हैं अभयदान सदा,देख मुझको चिर उद्गमित होती उसकी ममता! जानती नहीं तू रात और दिन कभी में कोई फर्क ,छुपा है तुम्हारे आदान-प्रदान में निश्छल प्रेम अर्क! आकांक्षाओं…
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जन्मदिन
जीवन में जन्मदिन का वजूद विशाल होता हैएक दिन ही सही, सागर -सौभाग्य बरसाता है। ज़रूरी नही ,मजलिस लगे,दावतों का हो सिलसिला!पता नही फिर भी क्यों इस दिन बढ़ जाती हैउमंगे-हौसला? यह कोई नई बात नही, बचपन से रहा इसका दबदबा !सभी अग्रज के आशीष का सच्चा साकार है फलसफा ! सूर्योदय से ही जन्नती…
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; ” THE UNSURMOUNTABLE”
Many a time, I wonder, watching the fleeting Clouds! They come and go without looking into any other direction, as if they were blinded from all sides alike a carriage horse, that cannot see anything, except its predestined path of journey! I wish I could send words of friendship and compassion request to these monsoon…