Category: Hindi Poetry
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Baal Krishna
अपनी करनी से सबको है छला छवि मधुर ऐसी है तुम्हारी लल्ला नन्हे पैरों मे बंधे घुँघरू छमकाते पकड़ बछिया की पूछ लटकते धुटने बल,बलदाऊ संग मिट्टी मे सरकते झूले पर बैठ ,जैसे बालक पींगे भरते। निर्बल बछडा जो व्याकुल हो दौड़ता बन्धी रस्सी बल लगा छुडाना चाहता तुम दोनो अपनाऔर जोर लगाते बेदर्द बने…
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कश्मकश
ये मन बडा ढीठ है,प्रकृति का कोई बात कभी नही मानता। ज्ञान की पोथी पढ़ बैठ जाता है सारे मसले सुलझाना चाहता है । तथ्य जान लेने से निदान नही मिलता बहुत छिपा है जीवन तथ्यसार में! कर्म-भोग एक बार मे नही होता खत्म , कई कड़ि जुटी रहती लगातार ,साथ में। प्र्यास की दौड़…
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“कहो न तुम हो अकेले!”
“कहो न तुम हो अकेले!” कभी कहो नहीं तुम हो बिलकुल अकेले तुम न बुलाओ फिर भी वह साथ सदा हो लेते हो जिनके तुम अंश, वही तुम्हारी प्रियांश उनके अस्तित्व को मारो ना दुख दंश! आना जाना मिलना जुलना सब है एक खेल। प्रेम -विलाप बनता रंगों का, इंद्रधनुष बेमेल। तत्व वही एक है…
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जय जय देवी खिचडी रानी!
जय जय देवी खिचड़ीअन्नपूर्णा की! जय जय जय त्रिभुवन देवी खिचड़ी अन्नपूर्णा की! अकाट्य महिमा इनकी,धरा-नभ-विस्तृत बहुत बड़ी। संतोषी सदाचरण रखतीं,कहने को हैं सीधी सादी, आग तपाआलू-बैंगन-भरता,चमकाआखें,हैंपरोसती ! घृत बघार,घृत-सुगन्ध, घृत -श्रृंगार का जादू लहराती! डोल जाते,सप्त ऋषी ,पाते इनकी महिमा लक्ष्मी सी! सखा सहेली इनकेअनगिनत ,कर न पाता कोई गिनती, अचार ,दही,तिलौरी …अरे छोड़…
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जय जय देवी खिचड़ी अन्नपूर्णा की!
ओम जय जय देवी खिचड़ीअन्नपूर्णा की! जय जय देवी खिचडी अन्नपूर्णा की! इनकी अकाट्य महिमा है विस्तृत बहुत बड़ी। संतोषी सदाचरण रखतीं,कहने को हैं बड़ी सादी, भाप तापती,बैंगन-भरता,चमका कर आखें,हैं परोसती ! घृत बघार,घृत-सुगन्ध, घृत -श्रृंगार का जादू लहराती! डोल जाते,सप्त ऋषी भी,पाते इनकी महिमा लक्ष्मी सी! सखा सहेली इनकेअनगिनत ,कर न पाता कोई गिनती,…
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खोज रहे है उनको
काश शाम नही आती,दिनकर उजाला हि रहता कुछ तो आस जगी रहती,मन उदास नही होता। बीत गई बाते,कह कह कर निश्चित,सबका है जाना। फिर क्यो बन मन की पीड़ा,बार बार वही है दोहराना? क्या सच मानव कठपुतली बन यहां जीवन है जीता पूछ रहा राधा क घायल मन,वेणूमन भी है रीता। कृष्ण का विक्षिप्त तन-मन…
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“जय जय जय गुलाब जामुन “
नमन प्रसन्नचित्त होकर करती क्योंकर तुमको, कारण बहुत हैं,पर प्रमुख एक बताऊं सबको। चित् चंचल,व्यग्र हो तो हलवाई के घर जाओ, गर्म मीठे रस मे होली खेलते दुलारो को जो पाओ, आगे नही बढना ,”नन्हे गुलाबो “पर बस आंख टिकाओ। जैसे जैसे तैराकों की छवि,आंखों पर छायेगी, उनको देखने भर से,विपत्ति दूर हो जाएगी। आ!हा!हा!कितने…
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“क्यो कहूं?”
क्यों कहूं मै थक गई गति ही जब प्रकृति है। ठहरता नही कहीं रास्ता, चलना ही उसकी रूचि है। क्यों कहू अब मै हार गई श्रम ही श्रृष्टी की है प्रकृति। चलती रहती निरत हवा है, बाधा छोड बस दिशा बदलती! क्यो कहूं,मेरी आस छूट रही, जब श्वास डोर से है बंधी वहीं। पुनः पूर्व…
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आरती का जन्मदिन
ओम हमारी आरती को जन्मदिन की ढेरो बधाई। 🥰🥮🌻 एक छोटी सी ,बड़ी चंचल है हमारी गुडियाजिससे बंधी सबकी,अनेक खुशी की पुड़िया। सीधी न बंध पाती कभी जिसकी चोटी,स्कूल तक, उसकी शिकायत थी करती! पेट दर्द बहाना बना,अन्न छोड़ भाग जाती एक ही थाली में बैठ, इसलिये ही संग खाती। दूर कौआ दिखा,स्वादिष्ट हिस्सा उड़ा…
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“सीता का प्रश्न “
“दीपक की प्रज्वलित शिखा संग सगुण मुखरित यौवन ,मधुर कर रहा था दीपावली काअयोध्या में पुनरागमनलव -कुश को समर्पित प्रजा-पोषण राज सुरक्षा पालन।पूर्ण धरा धर्म स्थापन कर,शेष शैया विराजे थे नारायण । अनुकूल न थी श्वास, सिसक रहा जैसे नेपथ्य आवरणक्षुब्ध, बना था शेष शैया क्षीरसागर का शान्त वातावरणअप्रसन्न,अश्रुरंजित क्षीण ,मुदित न था अष्टलक्ष्मी मन।गम्भीर…