Category: Hindi Poetry
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कुछ अलफाज
बहस में हार मान लेना ही औरों का मन जीतने कारहस्य है।
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मान लेना
ऐ मन मेरे मान लेना एक बात जब ग्लानि होवे ,कहना ना हटात् लगेगा कुछ पल,होगा सब साफ पंगत मे बैठ धीर, सुनना चुपचाप होता नही समान, कोई दो विचार बस सुन लेना,प्रगट करना आभार । थोड़ी सहनशीलता करेगी बेडा पार रिश्तेदारी का होता है प्रत्युपकार । सहज शान्त है इसका परिचायक इक पल सह…
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जाने क्यों?
ज़िन्दगी बड़े हौसले से शुरु होती है बधाईयं और शहनाईयों का जश्न होती है फिर आता है गोद से उतर कर ज़मीनी रास्ता, जाने कब हवा की झोंक में गुजरात है बचपन , और चढ जाता है चाहतों का नशीला रंग। नित नई गठरियां कंधों से लटकती हैं, वो मासूमियत, वो उल्लास, जाने कहां चले…
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कलियों का निमंत्रण
“कलियों का निमंत्रण” कह रहीं रंग भरी ये उत्साहित कलियाँ, अधखिली जाओ न अब तुम दूर,खिलने को हम व्याकुल अति । आये हैं बरसाने को भर आचंल, नौ रस तेरी बगिया में सारी याद करो वह भी दिन थे,जूझ रही थी,सूखी, नीरस डाली। फूलों का खिलना, सपना लेकर जीता था वह माली। किसलय को ही…
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गोपी मय संसार
नटवर इस बार जब मधुबन जब आना संग टोली गोपियन की निश्चय लाना और गोपो को एक एक बांसुरी दे दना जग मे चहु ओर उन्हे फैला देना वो माधुर्य तुम्हारा फैला दे, कहना। जग की मिट्टी को रंग दे, कहना तुम्हारा संदेसा गूंजेगा सबअगंना पत्थर भी सीखेगा मिश्री बहाना कण कण तब सीखेगा मुसकाना…
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प्रेम पिपासा
बीत गए दिन है अनेक, पर भूली नही है ,सहेजी वह याद, विस्मृत न हुआ कभी क्षण भर को भी वह सजल विशाद। नवल सजा था मेरा कोमल मन, अमराई भरा प्रासाद , भर गया था सहसा हृदय मे, उमंगित यौवन का आह्वाद। पहल कर रहे थे पिता पूज्यनीय, मेरा प्रस्तावित विवाह रिश्ता पींगे…
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तुम कौन हो?
उम्मीद के परे जब कुछ ऐसा हासिल होजाये जिसकी कल्पना भी न हो तो मन ईश्वर से ही पूछता है कि तुम कौन हो?
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स्मित मिलन
दिन ढल रहा है अब,फैल रहा रगं नारंगी सिमट रहा कोने मेआदित्य ले किरणे सतरंगी। लगा गोरी राधा समा रही थी कृष्ण आगोश नाच रहा थे नीले श्याम ,मनोहर नटवर नागेश। मुख कमलिनी का ,लज्जा ने मलिन किया सुकुमारी का तन गहराया,नभ श्यामल हुआ। पूछा बजती वेणू ने रुक कर, होअति असहज “पाती हो राधे…
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शुभ होगा मंगल -मय वर्ष 2021 सबका!”
शुभ-सूर्य ,का आशीर्वचन,होगा शुभ वर्ष 2021सबका! शुभकामना प्रभारित करेगा, चहु ओर शुभता सागर का। शुभ रंग -रूप धारण कर यह सबका सपना पूर्ण करेगा। शुभ- शुभ्र होगा प्रतिबिम्बित, सबकी प्रेरित भावनाओ का । शुभ- सौभाग्य से शीघ्र ही, विश्व प्रारब्ध सर्वआच्छादित होगा। शुभ स्वस्थ-मधुर स्वर कलरव ध्वनित, सबका घर आगंन होगा शुभदायक शुभाशीष लिए, मंगल…
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मिलन चिरंतन-2
अभी अभी बस निधीवन मे श्रीराधा को छोड़ पार कर रहे थे द्रुत गति वृन्दावन गलियन मोड ले रहे थे कदम,स्फूर्ति के साथ समय से होड, गय थे समझाने,पर बांध लिए फिर रिश्ते की डोर। तभी दूर से आती कुछ पहचानी टापो ने झकझोरा अनगिनत सुरभि ने बछडो संग, कान्हा को ले घेरा। प्रेम पगी…