Category: Hindi Poetry
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होली की अनेक बधाई और शुभ कामनाये!
अब मैं बच्ची नही रही। समय ने अनेक परिवर्तन किए पर फिर भी यह मन बचपन की यादों के साथ होली की हुड़दंग भी अभी तक समेटे हुए है,जिन्हे वह उपयुक्त मौकों पर चलचित्र की भांति समक्ष प्रस्तुत करतारहता है।मुझे आज भी याद है वो सब तैयारियाँ जिन्हें हम होली के बहुत दिन पहले से…
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Children are the soul of the world.Their intellectual ,social and psycological interaction creats the true weave of our future .Generally it is marked that the treatment they receive builds their personality.If they are treated with love and honor they develop the same response for people and their surrounding too.Observing a child will make this obvious. Rich or poor a child has no understanding of the difference between himself and other animals, birds or other humans;he has no idea of restrictions that are introduced to him,as that of cast,color ,creed ,region religion ,gender,age,status ,income…..He is a perfect humanbeing then.He holds only one relation which is of pure love and honor for everyone and everything .Then what happens to that child as he grows ?Why does he become extremely prejudiced ?why does his mindset suddenly change?There is tremendoes change in his thoughts, behavior ,opinion ,action. ..
OkWho,Why ,When ,where and what factor influences their innocent behavior?How is their response and opinion so drastically changed?It is utterly important to find out and redeem them because they are the secrets of peace and prosperity of our society and surrounding.Today there are several concerns that are disturbing the social -psycological weave of the whole…
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“चुनाव “
मौसम पूर्वानुमान भी छूट रहा है बहुत पीछे, नेता के भाषण प्रतिस्पर्धी फरीश्त बिछा रहे । रिझाने को वादा,आसमान ज़मीं पर लाने का करते, असम्भव को बातों ही बातों में पूरा कर जाते ! क्यों भूलते हैं षडयंत्रकारी!आया है अब युग राम का! असत्य हटा कर अब सर्वत्र “आयुध “हीआसीन होगा! आत्म-जागरण करेगी सरयू- मंदाकिनी-…
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लेकर श्वास साथ ,संग मिट्टी की सुगंध ,निर्मल जल धारा पोषित ,एक डाल पर खिलना ,एक हवामें पेंग मारना ,हर अनुभव साझा करना,फिर सबको समेट करयादों की गठरी बनाकरभविष्य खुशियों से भर देना,यही है मित्रता की सौगात। (स्वरचित एवं मौलिक)शमा सिन्हा4.8.24 Happy Friendship Day !
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“मनमोहन बाल रूप कान्हा का”
समस्त देश को जन्माष्टमी की अनेक बधाई और शुभकामनाएं! बड़ा ही मनमोहक है, चंचल यह बाल रूप तुम्हारा।चित को यूं ठंडा करता जैसे हो चपल मेघ कजरारा।। इसमें भरी चंचलता ने मोहा है यह संसार सारा।सांवरा तेरा रूप बना रौशनी भरा ध्रुव तारा।। तेरी एक झलक पाने, गोकुल हर पल राह निहारा।“छछिया भर छाछ”से बहला,गोपी…
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“शिक्षक को श्रद्धा सुमन”
शुभ दिवस है ,शुभ घड़ी है,अर्पित है शिक्षक को श्रद्धा सुमन !ऋणि तन मन धन उत्कृष्ट,आपको हमारा शत शत नमन ! शिक्षक शिक्षा का सुफल-शिखर,प्रज्वलित दीप प्रखर है,सृष्टि के कण कण का यह प्रहरी,इसका विश्वस्त भविष्य है। ब्रह्मांड को विनीत विधाता, जैसे देता मोहक स्वरूप है,स्वयं का परिचय देकर ,शिक्षक लिखता इसका भविष्य है। पुण्यप्रकाशित…
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मंच को नमनमान सरोवर काव्य मंच।शीर्षक -यह कलियुग है जनाबतारीख -१२.१२.२४विधा-कविता “यह कलियुग है!” यह कलियुग है जनाब, चलता जहां अनियमितता की शक्ति।, लूट-पाट चोरी का है बोलबाला और गुंडों की दबंगई। धन के रंग से फर्क नहीं पड़ता,धन वाले पाते इज्जत। लिबास पहन कर सोफीयाना, सीधे लोगों को करते बेइज्जत! गरीब की होती…
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लेखनी का संसारभाव प्रतिबिम्ब चित्र आधार शब्द:बेबसी की जंजीरदिनांक -११.१२.२४ ये कैसा दिया है पंख मुझे ,कैची धार बीच जो है सजे?बंधन छोर मुख बीच फंसे,दोनों का घातक खेल चले! भूख अपनी मिटा नहीं सकती,बातें अपनी कह नहीं सकती।खुली ज़बान तो होऊंगी परकटी,आप ही दो बबूल बीच अटकी! लाचारी भरी है मेरी मनोदशा,काल-कलुषित कर नारी…
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“उम्मीद का हश्र “
क्यों बार बार इस उधेड़-बुन में रहती हूं। नई उम्मीद के साथ मैं राह निहारती हूं । इस बार शायद मेरा हाल तुम पूछोगे। दुखती मेरी रगों को तुम सहलाओगे। हाथों में लेकर हाथ हृदय से लगाओगे! मेरी शिकायत तुम आज दूर कर पाओगे । हर बार अपनी ज़िद पर तुम अड़े रहते हो! हर बार…
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रहे गई है कुछ कमी
नित करती हूं मैं नियम अनेक फिर भी पाती नहीं तुम्हे देख। मेरे कान्हा करती हूं क्या ग़लती, व्याकुल यूं क्यों होकर मैं फिरती? कहो तुम्हारे वृन्दावन में ऐसा क्या, गोपाल बने मटकते वन में जहां? माना अच्छा ना था भोग हमारा पर अब तो हैं मेवा मिश्री भरा! रखती मैं तुम्हारी सेवा में वह…