Category: Hindi Poetry
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“मन को पत्र “
तुझको समझाऊ कैसे रे मन ,तू मेरा कैसा मीत, परिंदों की उड़ान,श्रावण समीर या है गौरैया गीत ? उड़ा कर साथ कभी ले चलते मुझको, इंद्रधनुष को छूने, घर के छत से बहुत ऊपर खुलते झरोखे जिसके झीने। बिना रोक टोक के चलतीं जहां, चारों दिशाओं से हवाएं, चमकती है चांदनी जहां से, और टपकती…
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“मुझे चाहिए!”
एक सखा सौहार्दपूर्ण चाहिए जो सुन ले। मेरी हर बात अपने पास सुरक्षित रख लें।। गलतियों को मेरी ढक कर दफन जो कर दे। दुखते जिगर के तार को स्पर्श कर सुकून दे ।। गम्भीर उसके बोल यूं हृदय में मेरे पैठ जायें। सुनकर जिसे मिट जायेअपेक्षा-मनोव्यथायें।। हो उसके पास ऐसा वह धन, सन्तोष की…
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काव्यमंचमेघदूत विषय -#चित्रलेखनदिनांक -25.9.24 “बादलों की बाहों में “ पहाड़ोंसे मिलने मैं जा पहुंची घाटी से दूर।पसरी धरती यूं सजी जैसे कोई चपल हूर।। रूई की गठरी से ढके आकाशीय दरख़्त ।देख मन मेरा, हुआ कुछ पल भय आक्रांत।। जैसे उतर रहा हो आकाश, ऐसा था नजारा।अचानक मिलने धरा से वह हो गया बांवरा।।…
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जीवन, पानी का बुलबुला
जीवन में संचित सारे सुख की लम्बाई है बस एक पल। बारिश की बूंदों सी,पलक झपकते जाती मिट्टी में मिल।। अभी अभी जो जन्म लिया इसलिए ही वह था रोया। इसलिए ही नये वस्त्र पाकर,तनिक ना वह खुश हो पाया।। स्मृति पटल ने चित्र साझा किये, अनेक पिछले जीवन के। व्याकुल हुआ देख खुद को…
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“मेरी अपनी -हिंदी भाषा “
मंच को नमनमानसरोवर साहित्य अकादमीमानसरोवर ई बुक पत्रिका हेतु, मेरी रचनादिनांक -12.9.24विषय -“मेरी अपनी- हिंदी भाषा “मेरी अपनी हिंदी भाषा” हृदय से आभार है मेरी अपनी हिंदी भाषा को।सौहार्द जगाकर जोड़ जाती मेरे सबअपनों को।। दूर देश बसे बच्चों में घोल देती असीम मृदुलता।मिलाती हर समय सहेलियों को इसकी सहजता।। कोयल सा कोमल सुरीला होता…
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मंच को नमन ।महिला काव्य -मंच प. रांचीतिथि -२८.८ २४विषय -बतरसविधा- दोहाशीर्षक – बतरस “बतरस”
बतरस होता है तब ही रस भरा।जब मिलता है मन उमंग भरा।। लौटता जैसे है बचपन फिर से।मस्त बने गांव गली में फिरते।। कितने मनोहर सब नटखट से सीखते।चतुर राबडी की कई कथा है सुनाते।। हार नहीं वे किसी से मानते।बढ़ चढ़ कर सब शेखी बघारते।। झूठी सांची धटना को जोड़कर।नये नये तिलिस्म तीर वो…
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मनमोहन बाल रूप कान्हा का
मानसरोवर काव्य मंचदिनांक:२६अगस्त२०२४विषय: मनमोहन बाल रूप कान्हा काविधा: कविता “मनमोहन बाल रूप कान्हा का” बड़ा ही मनमोहक है, श्याम यह रूप तुम्हारा।चित को यूं ठंडा करता जैसे हो मेघ कजरारा।। इसमें भरी चंचलता ने मोहा है संसार सारा।सांवरा तेरा रूप बना रौशनी भरा ध्रुव तारा।। तेरी एक झलक पाने, गोकुल हर पल राह निहारा।“छछिया भर…
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मैंने हंसना सीखा है
खिले पुष्पों को देख मैंने सीखा उनसे नई बात। छोड़ अपेक्षा, डालों को देना अमित चाहत।। किसलय से लेकर रक्त -रंग,दे देना उसको मात। वह रह जाते हरित, फूल सजते रंग भरी पांत।। गिनते नहीं कुसुम कहां खिले, बंजर या बरसात । पंखुरी की नस मे सजाते रेशमी धागा कात।। उनके बीच फिर नित नूतन …
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रोको ना मुझे
बह जाने दो मुझे, अब जिधर मन चाहता है। रोको ना आज मुझे, यही आज जी चाहता है ।। बेगानी हवायें खींच रही,मन दिशा चाहता है। नये सावन की टपकती बूंदें पीना चाहता है।। पूछो ना मुझसे कुछ,कारण ना कहो बताने को।रोको ना मुझे,पहले जरा स्वाद उनका ले लेने दो। देखा था मैंने पत्तों से…
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अच्छा लगता है
अच्छा लगता है सुबह शाम की तफरी। जबरदस्ती,पैर तलाशते हैं अपनी हस्ती।। छुप कर बगल से जब चंचल हवा है गुजरती। छूकर तन मन को, वो व्याकुल सा कर जाती।। लगता है वे मुझे अपने संग उड़ा ले जायेंगी। मुस्कुराते चेहरों से कभी भेंट करायेंगी।। कभी करूणा भरी तस्वीरें मुझे दिखायेंगीं। मेरी ज़िन्दगी कैसी हो…