Category: Hindi Poetry
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मंच को नमन।
लेखनी रचना का संसार दो दिवसीय आयोजन दिनांक -९.८.२४विषय -काव्यविषय -घर की चौखट घर की चौखट हमारे लोक- लाज और सुरक्षा को समायेउठते हर कदम को सबके, दिशा जो दिखाये।। अआशा और निराशा में रौशनी जगमगाये।लौटते पथिक को अपने आगोश में बसाये।। जोड़ कर सारे रिश्ते घर की ज्योति जलाये।इस पार से उस पार तक…
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चौखट
मंच को नमन। लेखनी रचना का संसार दो दिवसीय आयोजन दिनांक -९.८.२४विषय -काव्यविषय -घर की चौखट घर की चौखट हमारे लोक- लाज और सुरक्षा को समायेउठते हर कदम को सबके दिशा जो दिखाये।। अशा और निराशा को रौशनी जो दिखाये।लौटते पथिक को अपने आगोश में बसाये।। जोड़ कर सारे रिश्ते घर की ज्योति जलाये।इस पार…
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नमन वीर जवानों को
[11/01, 03:37] Shama Sinha: ॐSAHIARRA. my native village has always quizzed by its name. Its sandhi vichched(sahi +arrah) made me think why it is named so and if it is correct it should have been more developed than the Arrah townAnyway it stands with the same status as before with innumerable memories making it SAHI…
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Reminiscing Sahiarra
[11/01, 03:37] Shama Sinha: ॐSAHIARRA. my native village has always quizzed by its name. Its sandhi vichched(sahi +arrah) made me think why it is named so and if it is correct it should have been more developed than the Arrah townAnyway it stands with the same status as before with innumerable memories making it SAHI…
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सीता का प्रश्न
3 ” “ दीपक की प्रज्वलित शिखा संग सगुण मुखरित यौवन ।मधुर कर रहा था दीपावली काअयोध्या में पुनरागमन।। लव -कुश को समर्पित प्रजा-पोषण राज सुरक्षा पालन।पूर्ण धरा धर्म स्थापन कर,शेष शैया विराजे थे नारायण ।। अनुकूल न थी श्वास, सिसक रहा जैसे नेपथ्य आवरण।क्षुब्ध करुण बना था शेष शैया, क्षीरसागर का शान्त वातावरण।। अप्रसन्न,अश्रुरंजित…
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काव्यांजलि
[11/07, 16:24] Shama Sinha: About the authorBook titleBook descriptionPrefaceAcknowledgementDedication ………………….. कवियित्री परिचयनाम – शमा सिन्हाजन्म – ३-६-५४स्थान – पटना, बिहार।शिक्षा – एम.ए(अर्थ-शास्त्र)एम. ए(अंग्रेजी)एम.एड कोमल और संवेदनशील मन की धनी,शमा सिन्हा की शाब्दिक अभिव्यक्ति बचपन से ही कविताओं के रुप में परिणत होने लगी थी ।समय के साथ भाषा की परिपक्वता ने अपना प्रभाव बनाए रखा।…
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” समय का सपना “
सब लौट रहे हैं अपने निज घर , थका मन पर उत्साह भरा है स्वर! मंजिल पहुँचने के हैं जल्दी में । बच्चों संग, कुछ वक्त गुजारने! समय ,पंछी सा नजर है आता , सूरज नित नये सपने है दीखाता ! शाम,लेकर खुशी पल भर आती साथ। पतंग बन लम्हे उड़ा ले जाती रात! घोसलें…
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” करवाचौथ “
स्नेह रंजित अनुपम है यह सुहाग त्योहार । भरा जिस में त्याग- समर्पण-निर्मल प्यार ।। दीर्घ काल का साथ, दो आत्मा होतीं समर्पित। जैसे यह धरती और चंद्रमा इकदूजे को हैं अर्पित।। कार्तिक माह के चौथे दिवस को चांदनी जब आती। पैरों में बांध पैंजनी,तारो जड़ी चुनरी चमकाती ।। भर कर अंंजली पुष्प-पत्र-जल करती अर्पण।…
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“ऐसा क्यों होता है?”
क्यों, कभी कभी दुआ भी गलत मांग लेतें हैं हम! खुद को ही बस, जीत का हुनरबाज मान लेते हैं हम! सामनेवाले को हराने में, खुद ही हार जाते हैं हम, और गम को छुपाने में, सबकुछ बता जाते हैं हम!…………… वो क्या कहेंगें, हम पर हसेंगें, यही विचारते रह जाते हैं हम! वो भी…
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“प्रभु, सुन लो बिनति!”.बना दिया है अपना अंश मुझे,दिया वह सब अभिलाषित गुण,फिर क्यों नहीं सम्भव वह सब ,जो चाहता प्रति पल मन अब?
सशक्त शरीर क्षीणकाय रहा बन,स्मृतिह्रास अब हो रहा क्षण क्षण,आस सुहास समेटती दुर्बलता कण,मूक दृष्टा बन, निहार रही मैं सब। रुदन से ही होता है यह कथा प्रारंभननवजीवन पर्व बनता,शिशु का मंगल क्रदंनहर्षित मात पिता,होता है गुंजित कुल -कुंजनअवतरित मानव बनता,पूर्ण परमात्म स्पंदन! श्री सशक्त रहे अब भी,सत-आत्माऔर तन,निर्मल सहज रहे,पुरस्कृत यह यात्रा जीवन,मालिक, रख…