Category: Hindi Poetry

  • “कद ना नापो”

    श्यामल मेघआच्छादित फुहारों तले,टिप टिप बूंन्दो से बिंधती ,कोपलेंमिढ्ढी में धसी दूब ने सहसा पुकारा,“कभी मुझसे भी हाथ मिलाया करो,माना, तुम्हारा कद है ऊंचा बहुत, परइन लंबे दरख्तों को शर्मसार न करो ।ये भी,झाडिय़ों के बीच से निकल करहंसते हुये लताओं के साथ बढतीं हैं।तुम इंसा, भूलकर सत्य ,मुझपर चलते हो।मन को मन मे रख,हम…

  • “अकेलापन “

    खुद को अन्तर्मन से जो मिलवाये,अनुभवों को सुलझा कर समझाये,लेेकर भूली बिसरी याद जो आ जाए,मिठास भरा अपनापन दे जाये,कितना प्यार भरा इसमें,कैसे समझाएं?वक्त के घावों को धीरे से सहज सहलाये!अपनों की कद्र, परायों का मान बढ़ाये!जंग जीतने के कई रहस्य हमें समझाए !हार को हटा,जिन्दादिली भर जाये!स्वाभिमान भरा अनेक नई राह दिखाए!भरकर प्यार, असीम…

  • “प्यार का बन्धन”पुकारो प्रेम से ,कहो ना उसे,बंधन!वह तो बना है मेरे हृदय का स्पंदन !मासूमियत गर्भित वह महकता चंदन,करता मन जिसका प्रतिपल वंदन!

    तुम पास रहो या बस जाओ मुझसे दूर ,गूंजती रहती तम्हारी तान सुरीली मधुर।धड़कते श्वासों में बसे हैं तुम्हारे ही सुर,मेरा जीवन बना जैसे राधा का मधुपुर! क्या नाम दूं इसको, यह रिश्ता कैसे समझाऊं?प्रतिपल साथ मेरे, मग्न मैं इसको ही निभाऊं।“खुशियां तुम्हारे चूमें चरण!”मै गीत यही गाऊं,तुम पर ही अपना सर्वस्व न्योछावर कर जाऊं!…

  • “जाड़े की रात “

    घर मे त्योहार सा उमंग भरा माहौल था छाया मुन्नी माई के पास बेटे का टेलीग्राम था आया! दो रात की रेल सवारी करके,बेटा पहुंचा मुम्बई खुश देख छोटी बहन को, नांचने लगा नन्हा भाई! ” मिल गई है मुझे नौकरी!”खबर जब चिट्ठी लाई, “जाड़े की छुट्टी में सब जायेंगे!”,मुुन्ने ने शोर मचाई ! कंबल…

  • “आशीर्वाद “

    महिमा नापी ना जा सकती,ऐसा अमोल है होता आशीर्वाद, असंभव को भी संभव करता,पाकर इसे सभी होते कृतार्थ ! देव,ॠषी ,नर और असुर, इससेे सभी बलशाली हैं बनते, जागृृत करती यह शक्ति अनूढी,अतुुल वीर हम बन शत्रु पछाड़ते! करती पूर्ण सबकी कामना ,शगुन भी इसमें है नित दर्शन देते, “इक्ष्वाकु-वंशज आशीष”जैसे विभीषण को लंका नृप…

  • ” करवाचौथ “

    स्नेह रंजित अनुपम है यह सुहाग त्योहार । भरा जिस में त्याग- समर्पण-निर्मल प्यार ।। दीर्घ काल का साथ, दो आत्मा होतीं समर्पित। जैसे यह धरती और चंद्रमा इकदूजे को हैं अर्पित।। कार्तिक माह के चौथे दिवस को चांदनी जब आती। पैरों में बांध पैंजनी,तारो जड़ी चुनरी चमकाती ।। भर कर अंंजली पुष्प-पत्र-जल करती अर्पण।…

  • “सपनो का जीवन “

    कल्पना और अपेक्षा से भरकर बनाउंगी तस्वीर । सुखमय जीवन और मनभावन सुधार की तदबीर।। चुन चुन अपराजिता, हरश्रृंगार,भर खुशबू रंग-अबीर, पूर्ण करूंगी अधूरी मैं वह अपनी कल्पना की ताबीर ! श्यामल आकाश को मै कुछ ऐसे हिस्सो में बांटूंंगी। पुष्पित कुंज-गुच्छियों सा इंद्रधनुष से रंग डालूंगी।। आधे मे शरमायेगा सूरज,प्रभाति संग कुहुकेंगे बादल ।…

  • “ऐसा क्यों होता है?”

    क्यों, कभी कभी दुआ भी गलत मांग लेतें हैं हम! खुद को ही बस, जीत का हुनरबाज मान लेते हैं हम! सामनेवाले को हराने में, खुद ही हार जाते हैं हम, और गम को छुपाने में, सबकुछ बता जाते हैं हम!…………… वो क्या कहेंगें, हम पर हसेंगें, यही विचारते रह जाते हैं हम! वो भी…

  • “अकेलापन “

    खुद को अन्तर्मन से जो मिलवाये,अनुभवों को सुलझा कर समझाये,लेेकर भूली बिसरी याद जो आ जाए,मिठास भरा अपनापन दे जाये,कितना प्यार भरा इसमें,कैसे समझाएं?वक्त के घावों को धीरे से सहज सहलाये!अपनों की कद्र, परायों का मान बढ़ाये!जंग जीतने के कई रहस्य हमें समझाए !हार को हटा,जिन्दादिली भर जाये!स्वाभिमान भरा अनेक नई राह दिखाए!भरकर प्यार, असीम…

  • “ऐसा क्यों होता है?”

    क्यों, कभी कभी दुआ भी गलत मांग लेतें हैं हम! खुद को ही बस, जीत का हुनरबाज मान लेते हैं हम! सामनेवाले को हराने में, खुद ही हार जाते हैं हम, और गम को छुपाने में, सबकुछ बता जाते हैं हम!…………… वो क्या कहेंगें, हम पर हसेंगें, यही विचारते रह जाते हैं हम! वो भी…