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ऐ वक्त…..
ऐ वक्त तेरी किस्मत पर आता मुझे है रश्कपहन कर सरताज तू बेफिक्र हो, फिरता बेशक! तुुझपर तो बरसती हैं बेहिसाब खुदाई की रहमतें, ख्वाहिशों पर तुम्हारे नही किसी की कोई बंदिशे। हक है तुझे लकीर खींचने का जिन्दगी में सबके,हस्तक्षेप कर पल में,जीत लिया बेशक कई तमगें। किसी को कितनी भी हो तकलीफ, तुझे…
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“मैं ढूंढ रही अपनी वाली होली!”
“मैं ढूंढ रही अपनी वाली होली!” कहां छुुप गई वो रंंगीली प्यारी होली,आती जो बन अपनी, लेकर संग हुल्लड भरी बाल्टी , लाल- हरी नटखट सजनी? हमें भुलाने , मां हाथों में रखती,दस पैसे वाली पुड़िया कई, अबरक चूर्ण मिलकर जो बन जाता,चमकता रंग पक्का सही! हम शातिर बन इकट्ठा करते, बाजार में आई नई…
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“मैं ढूंढ रही अपनी वाली होली!”
कहां छुुप गई वो रंंगीली प्यारी होली,आती जो बन अपनी, लेकर संग हुल्लड भरी बाल्टी , लाल- हरी नटखट सजनी? हमें भुलाने , मां हाथों में रखती,दस पैसे वाली पुड़िया कई, अबरक चूर्ण मिलकर जो बन जाता,चमकता रंग पक्का सही! हम शातिर बन इकट्ठा करते, बाजार में आई नई तकनीकी, भैया दीदी काम आते,पोटीन की बनती…
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नील-मणि-अपराजिता
नील मणी बनकर तू आई!