• देर

    कहो समय, तुम गतिमान होते हो कैसे? साथ चलकर आगे निकल जाते मुझसे । प्रयास  पद की गति रुक जाती हो जैसे। और हाथ मांजती मैं रह जाती मूक ऐसे। देख बिलंब जोड़ती मैं, खोये कितने पैसे। मंजिल से दूर खड़ी, सोचूं पाऊं उसको कैसे । अब पछताय  क्या होता  देर हुई कुछ ऐसे समय…

  • मानसरोवर काव्य मंचतारीख:३०.३.२६शीर्षक:खुद के जैसी दुनिया तलाशना।

    “खुद के जैसी ही दुनिया तलाशना” अक्सर अकेलापन पाकर, मन दुखता है मेरा। खोज रही रौशनी ,हटाऊ कैसे,फैला यह कोहरा। लगाती कोयल आम्र वन का नित जहां फेरा। रिझाती मन के अंदर गुनगुना कर सिर्फ मेरा। सुनहरा जहां होता, सविता का रंगारंग सवेरा। लगता है वहीं सदा भावुक मन का फेरा। बिना रुके आता है…

  • नमन मंचमहिला काव्य -मंच प. रांची, झारखंड।विषय -चैत्र नवरात्रतिथि -: २१-३-२६शीर्षक – “मां का आगमन” “मां का आगमन”

    जगती है नूतन आशा,सुन संदेशा मां का। पूर्ण होती है मंशा जैसे,बंद हृदय कमल का। शांति संचार कर मन में , उर्जा देती शैलपुत्री। वृत्तियों को संयमित कर, प्रेरित करती ब्रह्मचारिणी। चंद्रघंटा स्वरूप देता ,रोग शोक भय से मुक्ति। कर व्याधि नाश , देती कुशमांडा,यश बल आयु शक्ति। ज्ञान और करूणा से, स्कंदमाता तन मन…

  • धैर्य भाग्य परिवर्तन

    धैर्य और भाग्य परिवर्तन इंटर पास करने के बाद ही जब उसकी शादी हो गई और बी ए. का कोर्स अधूरा रह गया तो उसके उमंग से भरे जीवन में जैसे एक लकीर सी खिंच गई। उम्मीद उसने बहुत की थी कि वह आगे बढ़ेगी डॉक्टर बनेगी किंतु समय के साथ सारे सपने अपनी जगह…

  • मायके का संदेश

    लघुकथा प्रतियोगिता१५ मार्च २०२६शीर्षक -“मायके का संदेश” “मायेका का संदेश “ “आम ले लो! आम ले लो! आम ले लो! मीठे मीठे आम ले लो!” करती हुई वह बुढ़िया गली के एक छोर से दूसरे छोर पर जाती ।अक्सर उसका सारा फल कोई ना कोई ले लेता। ऐसे तो वह उम्र से बुजुर्ग थी और…

  • मायके का संदेश

    लघुकथा प्रतियोगितामार्च २०२६शीर्षक -“मायके का संदेश” “मायेका का संदेश “ “आम ले लो! आम ले लो! आम ले लो! मीठे मीठे आम ले लो!” करती हुई वह बुढ़िया गली के एक छोर से दूसरे छोर और दूसरे छोर से तीसरे छोर पर जाती अक्सर उसका सारा आम सारा फल कोई ना कोई ले लेता ऐसे…