-
मौत इतना आकर्षित क्यों करती है
कहते हैं जग वाले माया ग्रसित है इंसान । अपार आनंद यह जीवन, जब तक है प्राण। इस पंच भूत काया के, गुण बहुत है महान । राम नाम का जाप कृपा देती है दुखों से त्राण। कहो फिर जन्म रुलाती क्योंकर उसे है ऐसे । जन्म मरण का क्रम चलता रहेगा यूं ही ऐसे।…
-
“पाओगे मन प्रीत “
खुश रहने की आदत बना लो। सब कुछ ईश समर्पित कर दो। जो कुछ मिले सहज स्वीकारो। समस्त परिस्थिति परिहार करो। है नहीं अपने बस में कुछ भी। कर्तव्य में रहो गतिशील सदा ही। निर्विकार हो चुनो राह सभी । उपजेगी सरिता मनप्रीत तभी त्याग अपेक्षा दाता बन जाओ। करने को कृतार्थ सदा हाथ उठाओ…
-
“लफ़्ज़ों को समझने वाले “
मंच को नमन।मानसरोवर काव्य मंचदिनांक -२८.४.२६विषय – लफ़्ज़ों को समझने वालेविधा -कविता “लफ़्ज़ों को समझने वाले ।” जग में हर कोई चाहता है। बोले वही लफ्ज़ हर कोई । जो उसका मन चाहता है। अफसोस,नहीं है समझ उनमें। ऐसी जो समझे लफ्जों को! जवाब में जगत कहे वही । जो भाता है उनके मन को।…
-
गर्मी से राहत
मंच को नमन ।महिला काव्य मंच पश्चिम रांचीशीर्षक-” गर्मी से राहत “विधा -कहानीतारीख- 28. 4. 2026 “गर्मी से राहत ” ईश्वरी एक संथाली युगती थी। देखने में वह बीस-बाईस साल के, लगभग की होगी। उमर को देखते ,वह ज्यादा गंभीर दीखती थी ।जब वह मेरे घर रेजा का काम ,करना शुरू की तो उसके तीनों…
-
आशा की किरणें
चलता रहेगा जीवन, पाकर आशा की किरणें। ख्वाहिशों का धागा लगेगा, आपका चित सतत् पिरोने । जले जो लौ विश्वास की , उजाला सा छा जाएगा। मुश्किल भरे रास्ते पर भी, चलना अति आसान होगा। एक हारे हताश मन को, चाहिए बस वह सूरज, चमकाए अंधेरा रास्ता देकर सामाधान सहज।
-
भारत भूमि नमन तुम्हें
तुम्हें नमन शत-शत बार ऐ भारत भूमि हमारी । तेरे ही सानिध्य मे अमृत तुल्य संतुष्टि मिलती पूरी। सम्मान सबका रखने वाली, जागृत भूमि क्रांतिकारी । इतिहास गवाह है, यह ना कभी बनी आक्रमणकारी । है सभ्यता भारत की समस्त विश्व में सबसे ही पुरानी। पांच हजार वर्ष से पूर्व,जीवित थी सभ्यता सिंधु घाटी। 700…