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कोई समझा नही
चाहती थी मैं अपने मन की बात उसे ही बताना! मन कसक उठता ,जजबाती बन जाता अफसाना! खोल नही पाती गांठ उफन कर रह जाता पैमाना! मिल कर अपनों से,मन रहता है वैसा ही अंजाना! प्याले में खोजती हूं मेराअपना वह पुराना आशियाना! लेकिन तय हो गया है, जल्द मेरा भी इस घर से जाना!…
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इंसान में इंसानियत
अरे, यह क्या हुआ बिखर गया है क्यों समाज धन की लोलुपता छोड़ कुछ नजर ना आता आज! नदी किनारे संयुक्त हुआ था करने को नेक काज टुकड़ों मे है बिखर गया कहलाया था जो समाज ! कहां बह गई वह टोली,गढित वह स्वर्णिम सभ्यता, लुप्त हुई मिठास दोस्ती की, अदृश्य हुई मानवता ! वह…
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रामायण काव्य महत्व
“रामायण की महत्ता” रामायण काव्य नही अपितु आदर्श संहिता हैं।समाज के प्रत्येक क्षेत्र के वर्णन के साथ, गुरु, माता ,पिता,स्त्री-पुरुष, भाई,मित्र,सेेवक यहा तक की दुश्मन की महत्ता का नाम रामायण है। नीतीपूर्ण जीवन के संदर्भ में समसामयिक घटनाओं का किस प्रकार आदर्श सामाजिक संयोजन होना चाहिए, इसी का वर्णन बालमीकी मुनी और तुलसीदास ने किया…
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हमारे गांधी
हिला दिया उसने,प्रवासीय प्रशासन विधी! लूट लिया तर्कों से अपने ब्रिटिश सरकार की गद्दी! वह क्रमचंद-पुतली बाई का था अनोखा सपूत! दो अक्टूबर 1869का दैवीय आनंदकोष अटूट! वह विलक्षण बालक बना हमारा महात्मा गांधी! अहिंसा के साथ चलाई जिस ने हिन्द राष्ट्रवाद की आंधी! पाकर संदेश मांगा जगत ने अपना नागरिक अधिकार ! नेतृत्व में,…
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रामायण
“रामायण की महत्ता” रामायण काव्य नही अपितु आदर्श संहिता हैं।समाज के प्रत्येक क्षेत्र के वर्णन के साथ, गुरु, माता ,पिता,स्त्री-पुरुष, भाई,मित्र,सेेवक यहा तक की दुश्मन की महत्ता का नाम रामायण है। नीतीपूर्ण जीवन के संदर्भ में समसामयिक घटनाओं का किस प्रकार आदर्श सामाजिक संयोजन होना चाहिए, इसी का वर्णन बालमीकी मुनी और तुलसीदास ने किया…