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“अपनी वाली होली”
“मैं ढूंढ रही अपनी वाली होली!” कहां छुुप गई वो रंंगीली प्यारी होली,आती जो बन अपनी, लेकर संग हुल्लड भरी बाल्टी , लाल- हरी नटखट सजनी? हमें भुलाने , मां हाथों में रखती,दस पैसे वाली पुड़िया कई, अबरक चूर्ण मिलकर जो बन जाता,चमकता रंग पक्का सही! हम शातिर बन इकट्ठा करते, बाजार में आई नई…
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वर्षा ऋतु
भगाने को जेठ की चिलचिलाती धूप वर्षा ऋतु लाती श्रावण -भाद्रपद बंदूक प्यासी धरती की सुनकर ऊंचीपुकार आकाश चट पहन लेता इंद्रधनुषी हार! आती हवा सागर की लहरे अथाह बटोर, पिघलती पर्वत पर बर्फ की शिलायें कठोर ! उफनती नदियां,भरते पोखर तालाब , बच्चे खेलते कूद कूद पानी में छपाक! बादल संग जोआतीं बारिश की…
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“धनतेरस “
आओ देव धन्वन्तरि को करें संतुष्ट स्वस्थ रहे तन,विवेक हमारा हो पुष्ट ! सरस्वती का सहर्ष करें आवाह्न, स्वतः विराजेंंगी तब लक्ष्मी कमलासन! घर घर नित पायेगा कृपा नारायण, पधारेंगें द्वार सिया-रघुुवर -लक्षमण! अयोध्या बसेगी हमारे शुुभ आंगन , समृद्धी से होगा,आलोकित हर प्रांगण ! धनतेरस की अनेक शुभ कामना! शमा सिन्हारांची10-11-23
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माता लक्ष्मी
“माता लक्ष्मी” जहां सरस्वति बनती अग्रणी, स्थाई बसती वहीं सदा लक्ष्मी! ज्ञानदीप को प्रज्ज्वलित कर, पनपाति विष्णुप्रिय दामिनी! कारण छिपा ,एक अति गहरा, श्रम में है चिर ज्ञान पनपता ! खेत खलिहान स्वर्णउपजता, अनुकूल बीज जबश्रमिक है बोता! बिन विद्या, कला नही निखरती, ज्ञान बिना व्यर्थ जाती हरशक्ति! विद्या विरााट देती स्थिर समृद्धी, लक्ष्मी जिसके…
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MIRAGE
What a surprise I’m risen with uncontrolled urge A move never wanted yet desires surge Fast mind wants to surpass promises made, Brushing aside ideals of self reliance await, To tread fast into a matted expectation web Blooms and trees all intently pull me back Each bud peeps with many questions in sack I want…
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“भैया दूज”
बचपन की कुछ प्यारी यादें,आज आप सेकरती हूं साझा। जीवन होता था सरल बहुत तब,पारदर्शी थी व्यव्हारिकता ! परिवार हमारा साथ मनाता त्योहार मनाता,एक ही आँगन में जुट, सबको यही चिंता रहती,कोई भाई बहन ना जाए खुशी में छूट! भाई दूज पर बनता पीठा-चटनी,फुआ बताती बासी खाने की रीती चना दाल की पूड़ी, खीर, आलू-टमाटर-बैगन-बड़ी…