• “आशीर्वाद “

    महिमा नापी ना जा सकती,ऐसा अमोल है होता आशीर्वाद, असंभव को भी संभव करता,पाकर इसे सभी होते कृतार्थ ! देव,ॠषी ,नर और असुर, इससेे सभी बलशाली हैं बनते, जागृृत करती यह शक्ति अनूढी,अतुुल वीर हम बन शत्रु पछाड़ते! करती पूर्ण सबकी कामना ,शगुन भी इसमें है नित दर्शन देते, “इक्ष्वाकु-वंशज आशीष”जैसे विभीषण को लंका नृप…

  • “WORDS OF THE WINGED”

    Night waned,sky has raised another curtain,Surprised I am as enters the divine Sun!A tiny dot popped up when I gazed intently,Darkness still ruled when rosy rays creept secretly!River rippled softly,mountains shone graceful ,Leaves rustled quietly among branches cheerful!Birds bobbed their heads to select a direction,Up they took a flight,marking a celebration!“It rises every morning,what makes…

  • “बस मुस्कुराना सीख लो !”

    बस हर बात पर मुस्कुराना शुरु कर दो ,यादो को सारी, हवा के नाम कर दो. वो निशान, वो चुभन सब एकबारगी,खुशबुये चमन के नाम वसिहत कर दो ! आखों मे चमक आएगी नसों मे नरमियत ,होगा अहसास ,झूठी थी वो सारी दहशत ! साथी ना हो फिर भी जलसा सा लगता है,हर सांस मुक्कददर…

  • ” Tryst with the Sun”

    Fast, I saw him,spreading his mighty traces. And called him aloud as he smeared pastel red rays. “Don’t you ever feel lonely in that big wide space? I see no company treading with you at your pace! Your schedule is strange, peculiar is Your way! You move not with planets, they dance on your play!…

  • “मुस्कान “

    परिस्थिति कोई हो,सहज देता यह सबका समाधान । “अहंआनंन्दम”,रंग देता चारो दिशा सम्पूर्णआसमान ! दूरी सारी मिट जाती,अपनेपन की सजती होली! रंगोत्सव चिबुक खेलता,आखें बोलती प्रेम की बोली! अपने में छुपाये रखता,जाने कितने गमों की रोली, इसका मूक मधुर संगीत बनाता दिल वालों की टोली! पल भर में ही कह यह डालता बातें कितनी अनबोली,…

  • “आंख चुरा कर!”

    मन को भाता तेरा, गोप बालकों संग खेलना मोहन! आंख चुरा कर,मार कंकरी टूटी मटकी से लुटाना माखन ! बड़ा मनोहर लगता जब मैया लाठी ले दौड़ाती तुझको! छुप करआंचल में, कथा नई सुनाकर ठगता तू उसको! तेरा खेल निराला, पशुधन का मालिक होकर चोरी कर खाता! देेख छवि अपनी मणी खंभें में,झट नई कहानी…