-
“Words of the winged!”
Night waned, mirthful sky raised another curtain,Surprised I was as entered the divine Sun!A tiny dot popped up when I gazed intently,Darkness still ruled and rosy rays creept secretly!River rippled quietly,mountains shone graceful ,Leaves rustled soft among branches cheerful!Birds bobbed their heads to select a direction,Up they took a flight,marking a celebration!“It rises every morning,what…
-
ममता की रचियता
तुम चाहे कुछ ना कहो!अपना परिचय भी ना दो!मौन तुम्हारी परिभाषा है,जीवन की तुम ही आशा हो! सफल परीक्षण ममता करती,उद्घोषक हो सबके नियती की!तुम शक्ति, तुम ही हो सरस्वति!जीवन दायक ,तुम ही हो धारिणी! माता ,मित्र,सेविका सहचरी हमारी!हर रूप में लगती अपरिमित न्यारी!भरती खुशियां,सुन हमारी किलकारी!सृजित कण कण ब्रह्मांड तुम्हारी धूरी!
-
“नये वर्ष के लिए “
कल्पना से भरी हुई अपेक्षा की तस्वीर , सुखमय और जीवन्त सुधार की तदबीर! चुन कर खुशबू फूल हरश्रृंगार,रंग-अबीर, पूर्ण करूंगी अधूरी मैं वह अपनी ताबीर ! आकाश को मै कुछ ऐसे हिस्सो में बांटूंंगी, पुष्पित कुंज-गलियों में गायेगी कोयल काली! आधे मे शरमायेगा सूरज,सजेंगे ऐसे बादल , बाकी में नाचेगा चांद,साथ चलेंगें तारे पैदल!…
-
बीते वर्ष की सैर/जाता हुआ वर्ष
अनुुभव बहुत सारे बटोरकर रख लिया है। इसीलिए लिए तो आज वह याद आया है। समेट अपने सारे,एक एक रंग बिरंगे पंख ठंड मे हीआया था,उड़ गया फुर्र से नभ! स्वस्थ और मस्त था”दह-चूड़ा”,सूर्य-संक्रांती का, लाजवाब स्वाद खिचड़ी-चोखा,पापड़ अचार था! फिर मची धूम शादी ब्याह और भोज के न्योता से। उम्र के इस मोड़ पर,इम्तिहान…
-
“लम्बे सफर में”
गतिरत रचना प्रभू की जैसे है विचरती। सूर्य-चंद्र और नभ की विधा सारी दीखती । यह जीवन भी अविरल चलता सदा रहता है! बिना रुके कर्म का हिसाब करता रहता है। सारे जीव बंटे है कर्म अनुसार कई श्रेणी में। गगन और धरती के बीच डोलते हैं बंंधन में। सफर यह नायाबअंतहीन चलता ही रहता…
-
अयोध्या नगरी
जला रहे सब सगर नगरी में घी का दिया, सज गई जोड़ी ,अयोध्या के राम और सिया। साकेेत नगर वासी देखो ले रहे हैं उनकी बलैया, वारी जायें, कौशल्या,सुमित्रा केकैई तीनों मैया! मच गई राजसी धूम देखो दशरथ की नगरिया! देनेआयेआशीष सब देवों संग शिव-सती मैया । अगुआई करें इक्षवाकु दीपक,पीछे अनुज भैया! न्योछावर वीर…