• “यात्रा”

    कहो सखी,करूं बात मैं किस किस यात्रा की? क्या गीता के सात सौ श्लोकों में अर्जित ज्ञान की? या मां के आंचल में दुनिया से छुपकर अमृतपान करने वाली? या बालपन की दौड़ती भागती,छिपा-छुपी का रास्ता ढूढ़ने वाली? अथवा विद्यार्जन पथ पर अनेक कोशिशों में जूझती जिन्दगी? क्या प्रेम के झूले पर मीत संग, बिताए…

  • On Nishu ‘s Birthday, 5.12.23

    A very happy birthday to our Nishu! May the Almighty bless you with health and satisfaction always 🙏 “Remembering you lovingly!” This day is so auspicious, it brings gifts ofmany loving memories ! Full of joy were your childhood pranks , your Papa and I eternally cherish ! Those days are gone but its remembrances…

  • “पिता”

    “पिता” गोद लेने को उसे,देखा था मैंने सदा बहुत मचलते,जन्म-स्वास्थ्य-उपचार पश्चात मैं थी मातृ-तन सट के! जुटी नाल ने कर दिया था स्थापित रिश्ता जन्मदात्री से,समझ ना पाई, कैसे स्थापित हुआ सम्बन्ध उसका हमसे! सदा वह निहारता हमें, कभी दूर और कभी पास से!गूंजती हमारी ऊंची किलकारियां, उसके अंक समा के! सुबह और शाम ही…

  • “अहंकार “

    सर्वशक्तिमान, जब स्वयं को समझ लेता है इंसान ,उत्पन्न होता है अहंकार और विकृत होता है स्वमान! होती नष्ट समझदारी,मिट जाता मानव सम्मान,प्रतिपल तब करता वह अपनी मूढ़ता पर अभिमान! वाचाल बन कर,करता सिद्ध नासमझी का सिद्धांत ,छोड़ गुरु से पाई सुशिक्षा, स्वरचित गड्ढे में गिरता कालान्त! गर्भित बुद्धिहीनता उसकी करती ना कभी किसी का…

  • खिलौना”

    देखते तो सभी हैं,खिलौने को खिलौने से खेलते,भूल जाते सच्चाई ,बीच का फर्क नही समझ पाते! बंधी होती है एक की डोर आकाश पार,दूजा निर्जीव किंतु लुभाता दिखा रंंगीनआकार! एक स्वत्: दिखाता भावों की प्रधानतादूसरे को कृत्रिम चाभी देकर चलाना है पड़ता! भूल कर सरताज परमपिता का साम्राज्य वह हंसता है,वह जड़ मूर्त कृत्रिम खिलौना…

  • “नया सवेरा”

    गहराते आकाश पर छिटकने लगती है लाली!फूटने लगता है उजाला,चीरकर रात्री काली! समस्त नभ में गूंंजता है परिंदों का कलरव,नीलाभ हो जाता है गतिशील शीतल अरणव! धरा कर सर्वस्व समर्पित बन जाती मूूक दृष्टा,चल पड़ता मनुष्य सिद्ध करने अपनी श्रेष्ठता! इच्छा और अभिलाषा की मचती धराशायी प्रतियोगिता,बिदा होती सुख-शांति,देकर सिर्फ असीमित व्यथा! सम गतिमान, सप्त…