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पूछो इनसे!
पूछो इनसे किसके स्वागत मे खिलती ये गुड़हुल की कलियां,लाल रंगीली! मीठा रस-पाक भरकर आचंल में बुला रही डाली पर परिन्दे नन्हे! देखो उनकी चतुराई हठीली पंख पसार बैठ डाल हरियाली मधु सुगंधित बनाने ले जाती हैं रस, रानी की खिदमत में फिर जाती बस! हरे चमकते पत्तों की बिछा कर चादर बुला रही मधुबन…
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Too little a time
it’s vehemently hard to explain, For a soul that suffers onspot when an event hard strikes! Wounds more a heart broke! Disagrees ,what reasons judge! people intervene, Apathetical, a show artfully disjoined! interests, revolving, in their favor! A situation distraught! Alike one’s house burning Yet others ,ask water buckets, To cool ,their presumption of A…
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आदते बदल रहीं हैं!
आदतें अब बहुत बदल रहीं हैं, उसकी खर्च की लकीर अब हो रही जैसे टेड़ी, पहले मन को वह बहुत संभाल थी लेती धैर्य क्या छूट।, सब स्वतंत्र बहा है देती। तब पाई-पाई, हिसाब का खाता थी रखती , अब लंगर से निकली, भवर में नांव उलझती , ज़बान की चटपटी उड़ान पर पोटली खुलती…
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कभी नहीं पूछा
पूछा नह ,कभी धरा से कैसे सहती हमारा वार लालच मे तुम्हेबींधता यह जग, यह निष्ठुर संसार। ह्रदय चीर तुम्हारा, लूटते तुम्हारे गौरव का संसार, फिर तन कर गर्व से कहते देखो दिया है,धन अपार! मूक बनी तुम देखा करती जरा न उलटती,ह्रदय का भार, बदले मे मेरा तनमन पालती अंजुली मे लेकर,भाव उदार। बार…