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  • पूछो इनसे!

    May 29, 2022

    पूछो इनसे किसके स्वागत मे खिलती ये गुड़हुल की कलियां,लाल रंगीली! मीठा रस-पाक भरकर आचंल में बुला रही डाली पर परिन्दे नन्हे! देखो उनकी चतुराई हठीली पंख पसार बैठ डाल हरियाली मधु सुगंधित बनाने ले जाती हैं रस, रानी की खिदमत में फिर जाती बस! हरे चमकते पत्तों की बिछा कर चादर बुला रही मधुबन…

  • ओम
    “ओ पाखी!”
    है कितनी बातें,तेरे पास ,ओ पाखी!प्रातः उठते ही फुदकती , चहचहाती!
    दुनिया को क्या मौसम की सूचना हो देती ?
    या मिल कर दिनचर्या की योजना बनाती?
    उगते ग्रीष्म सूर्य से क्या तू परेशान नही होती?
    चुपचाप बैठ घने पेड़ों में,स्फूर्ति क्यो नही बटोरती?
    रखा है तेरे लिए, दाना और सकोरे मे पानी
    चुग लेनाआकर,दो बूंद सही पी लेना गौरैया रानी!
    मुझे तो कुछ नही दीखता,तू क्या है चुगती?
    चंचल ढूढ़ती आखों से तू जाने क्या है पाती।
    चूं चूं ,चींचीं,कुहुक कुहुक कर जाने कौन सा राग सुनाती
    तेरी भाषा जो समझ लेती,मै संग तेरे बतियाती!
    होता कितना समय मनोरम,तुम और मै ढेरों बातें करतीं ,
    तुम अपनी उडान बताती,कह सुनकर दोनों कितना हंसतीं!
    दे देती दो पंखो अपने,तेरे ही संग मैभी उड़ चलती!
    ऊंचे पहाड़,बादल बीच फूलों के बाग देख हम आतीं!
    सच मानो,रोज सुबह, बाट तेरा मै ब्याकुल हो,जोहती,
    तेरी मीठी बोली सुन,बीच डालियों में, तुझे हूं खोजती!
    फड़फड़ा कर पंख,कभी चकमा भुझे जो तू है दे जाती,
    चकरा कर, ऊचाईयों में,तुझे खोजती मैं रहती,
    ऐ पाखी,कभी आवाज तेरी सीटी सी क्यो हैलगती,
    हड़बड़ाहट सी होती है,लज्जा से मै हूं सिकुड़ती।
    मेरे आंगन की तू लक्खी,करती घर-मन गुंजार,
    हरे भरे मेरे इन वृक्षों की, गूंज तेरी करती नव-श्रृंगार !
    ओ परी नन्ही सी!आ इन फूलो का मधु-रस तो पीले!
    इनकी कोमल पंखुड़ियों को,अपने स्पर्श से दुलार ले!
    प्रतीक्षा में तेरी ,गर्दन इनकी झुक सी है जाती,
    झूलने को डाली के झूले पर ,राह तेरा ही निहारती।
    दाना भी है कह रहा,”आ जाओ बन मेरी मेहमान ,
    स्वच्छ शीतल जल है , थकी हो,कर लो इसका पान!”
    “आज न आ सको तो, कल जरूर तुम आना,
    छुपकर ही सही,डाली पर बैठ मधुर गीत सुनाना!”
    शमा सिन्हा
    22-4-22

    May 29, 2022

  • Too little a time

    May 29, 2022

    it’s vehemently hard to explain, For a soul that suffers onspot when an event hard strikes! Wounds more a heart broke! Disagrees ,what reasons judge! people intervene, Apathetical, a show artfully disjoined! interests, revolving, in their favor! A situation distraught! Alike one’s house burning Yet others ,ask water buckets, To cool ,their presumption of A…

  • आदते बदल रहीं हैं!

    May 29, 2022

    आदतें अब बहुत बदल रहीं हैं, उसकी खर्च की लकीर अब हो रही जैसे टेड़ी, पहले मन को वह बहुत संभाल थी लेती धैर्य क्या छूट।, सब स्वतंत्र बहा है देती। तब पाई-पाई, हिसाब का खाता थी रखती , अब लंगर से निकली, भवर में नांव उलझती , ज़बान की चटपटी उड़ान पर पोटली खुलती…

  • कभी नहीं पूछा

    May 29, 2022

    पूछा नह ,कभी धरा से कैसे सहती हमारा वार लालच मे तुम्हेबींधता यह जग, यह निष्ठुर संसार। ह्रदय चीर तुम्हारा, लूटते तुम्हारे गौरव का संसार, फिर तन कर गर्व से कहते देखो दिया है,धन अपार! मूक बनी तुम देखा करती जरा न उलटती,ह्रदय का भार, बदले मे मेरा तनमन पालती अंजुली मे लेकर,भाव उदार। बार…

  • “मातृ दिवस”-मेरी अविस्मरणीय स्मृति

    May 29, 2022

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