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Baal Krishna
अपनी करनी से सबको है छला छवि मधुर ऐसी है तुम्हारी लल्ला नन्हे पैरों मे बंधे घुँघरू छमकाते पकड़ बछिया की पूछ लटकते धुटने बल,बलदाऊ संग मिट्टी मे सरकते झूले पर बैठ ,जैसे बालक पींगे भरते। निर्बल बछडा जो व्याकुल हो दौड़ता बन्धी रस्सी बल लगा छुडाना चाहता तुम दोनो अपनाऔर जोर लगाते बेदर्द बने…
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कश्मकश
ये मन बडा ढीठ है,प्रकृति का कोई बात कभी नही मानता। ज्ञान की पोथी पढ़ बैठ जाता है सारे मसले सुलझाना चाहता है । तथ्य जान लेने से निदान नही मिलता बहुत छिपा है जीवन तथ्यसार में! कर्म-भोग एक बार मे नही होता खत्म , कई कड़ि जुटी रहती लगातार ,साथ में। प्र्यास की दौड़…
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“कहो न तुम हो अकेले!”
“कहो न तुम हो अकेले!” कभी कहो नहीं तुम हो बिलकुल अकेले तुम न बुलाओ फिर भी वह साथ सदा हो लेते हो जिनके तुम अंश, वही तुम्हारी प्रियांश उनके अस्तित्व को मारो ना दुख दंश! आना जाना मिलना जुलना सब है एक खेल। प्रेम -विलाप बनता रंगों का, इंद्रधनुष बेमेल। तत्व वही एक है…
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जय जय देवी खिचडी रानी!
जय जय देवी खिचड़ीअन्नपूर्णा की! जय जय जय त्रिभुवन देवी खिचड़ी अन्नपूर्णा की! अकाट्य महिमा इनकी,धरा-नभ-विस्तृत बहुत बड़ी। संतोषी सदाचरण रखतीं,कहने को हैं सीधी सादी, आग तपाआलू-बैंगन-भरता,चमकाआखें,हैंपरोसती ! घृत बघार,घृत-सुगन्ध, घृत -श्रृंगार का जादू लहराती! डोल जाते,सप्त ऋषी ,पाते इनकी महिमा लक्ष्मी सी! सखा सहेली इनकेअनगिनत ,कर न पाता कोई गिनती, अचार ,दही,तिलौरी …अरे छोड़…
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जय जय देवी खिचड़ी अन्नपूर्णा की!
ओम जय जय देवी खिचड़ीअन्नपूर्णा की! जय जय देवी खिचडी अन्नपूर्णा की! इनकी अकाट्य महिमा है विस्तृत बहुत बड़ी। संतोषी सदाचरण रखतीं,कहने को हैं बड़ी सादी, भाप तापती,बैंगन-भरता,चमका कर आखें,हैं परोसती ! घृत बघार,घृत-सुगन्ध, घृत -श्रृंगार का जादू लहराती! डोल जाते,सप्त ऋषी भी,पाते इनकी महिमा लक्ष्मी सी! सखा सहेली इनकेअनगिनत ,कर न पाता कोई गिनती,…
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