• कलियों का निमंत्रण

    “कलियों का निमंत्रण” कह रहीं रंग भरी ये उत्साहित कलियाँ, अधखिली जाओ न अब तुम दूर,खिलने को हम व्याकुल अति । आये हैं बरसाने को भर आचंल, नौ रस तेरी बगिया में सारी याद करो वह भी दिन थे,जूझ रही थी,सूखी, नीरस डाली। फूलों का खिलना, सपना लेकर जीता था वह माली। किसलय को ही…

  • सीतारामायण

    सीता की सहनशीलता ने ही राम को पुरूषोत्तम राम बनाया।

  • गोपी मय संसार

    नटवर इस बार जब मधुबन जब आना संग टोली गोपियन की निश्चय लाना और गोपो को एक एक बांसुरी दे दना जग मे चहु ओर उन्हे फैला देना वो माधुर्य तुम्हारा फैला दे, कहना। जग की मिट्टी को रंग दे, कहना तुम्हारा संदेसा गूंजेगा सबअगंना पत्थर भी सीखेगा मिश्री बहाना कण कण तब सीखेगा मुसकाना…

  • Tell me what what do I speak

    surrendering one’s opinion and for that moment and accepting that of your loved one begets multiple shared moments of happiness

  • प्रेम पिपासा

    बीत गए दिन है अनेक, पर भूली नही है ,सहेजी वह याद, विस्मृत न हुआ कभी क्षण भर को भी वह सजल विशाद।   नवल सजा था मेरा कोमल मन, अमराई भरा प्रासाद , भर गया था सहसा हृदय मे, उमंगित यौवन का आह्वाद। पहल कर रहे थे पिता पूज्यनीय, मेरा प्रस्तावित विवाह रिश्ता पींगे…

  • तुम कौन हो?

    उम्मीद के परे जब कुछ ऐसा हासिल होजाये जिसकी कल्पना भी न हो तो मन ईश्वर से ही पूछता है कि तुम कौन हो?