• हवा क्यों रही गुनगुना

    मानसरोवर काव्य मंचतारीख -९.४.२५शीर्षक -हवा क्यों गुनगुना रही हवा क्यों रही ऐसे गुनगुना?दे रहा पीड़ा यह पवन सूना।आये नहीं क्या बनाया बहाना?किससे बाटूं यह गीत,ओ सजना! मन में उमड़ रही आज अनेक बात ।कैसे पहुचाऊं उन्हें तुम्हारे पास।भेज रही लिखकर यह कोमल पात।चला रही लेखनी असुवन साथ। चाहती दिलाना याद वह चांदनी रात।अमृत वर्षा बटोरते…

  • “पत्र “

    मंच को नमन महिला काव्य- मंचपश्चिम रांची जिला इकाईतारीख -९.४.२५विषय -खत/संदेशा मन में उमड़ रही आज अनेक बात ।कैसे पहुचाऊं उन्हें तुम्हारे पास।भेज रही लिखकर यह कोमल पात।चला रही लेखनी असुवन साथ। चाहती दिलाना याद वह चांदनी रात।अमृत वर्षा बटोरते रहे अंजलि हाथ।बिना बोले हम सुना रहे थे बातें सात।कोयल की गूंज सहसा दे गई…

  • “लगन तुमसे लगा बैठे “

    मानसरोवर साहित्य अकादमीभोर सुमिरनदिनांक ३.४.२५प्रदत्त विषय – लगन तुमसे लगा बैठे लगन तुमसे लगा बैठे बेखबर हम कृष्ण।चले ढूंढते तुम को कुंज की हर शाख तृण।। देख वृक्ष से लटका वह तुम्हारा पीताम्बर ।मस्ती में लगी डोलने, उसकी बन मै चंवर।। छेड़ दी मोहन तुमने यह कैसी चाहत की धुन।खोकर सुध मैं लगी थिरकने, तुम्हारी…

  • नव वर्ष बधाई

    नमन मंच को भोजपुरी मानसरोवरतारीख: 29-3-25 “नव वर्ष बधाई” नव वर्ष मंगलमय हो सबका।आया शुभ महीना चैत्र का।प्रारंभ सप्तशती पाठ हुआ।जला,दीप मां अम्बिका का। बजने लगा घंटा मंदिर काआया जन्म दिन रघुवीर कादेवताओं ने किया पुष्प वर्षानवमी तिथी चैत्र मास का। मंगलमयी हो गयी अयोध्या।घर घर बजें पुनीत बधावा ।सजा महल दशरथनन्दन का।सजा सौभाग्य मां…

  • आज की मीरा

                      “आज की मीरा” नहीं कहने को बचा था,उसके पास एक तारे की बात।ना वह नाच सकती थी, लेकर भजन भक्तिको साथ । प्रयत्न कर वह सुर योग की, कुछ बुन लेती आज।प्रशिक्षण लिया ध्यान लगाना, मध्यम धुन साज। गोद बिठाया बाल कृष्ण को निर्मलताके साथ।मन ही मन करती उनसे अपनी कई सारी बात। तोड़…

  • सद्कर्म ही मेरे जीवन की पूंजी है।

    हिन्दी सृजन सागरदैनिक प्रतियोगिताविषय:सत्कर्म ही मेरे जीवन की पूंजी हैतिथि २५.३.२५ सत्कर्म ही ही मेरे जीवन की पूंजी है। लेकर जिस को उड़ता प्रारब्ध पंछी है। देन लेन का काम सब इसके जिम्मे है। अपने बस में बस यही एक कृत कर्म है। समर्थ मनुष्य भी, कुछ और ढोल पाता है। अन्त समय दोनों हाथ…