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धानी
नमन मंच।महिला काव्य मंच पश्चिमी रांची जिला इकाई।दिनांक -२३.७.२५विषय -धानीविधा -कविता धानी बरस रहा देखो झर झर पानीपसर रहा है रंग चहुंओर धानीकह रहा मोर,देख कर मोरनी,सुन कुछ बोल मेरे,ओ सजनी! देखो, छाए घने बादल काले,बरसा रहे बूंदन के फूल प्यारे!खेतों में सज रहे धानी नजारे,आओ सखी हम कजरी गायें! कहो मेहंदी से,रंगजाये धानी!रंगे सुहागिन…
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ज़िन्दगी की दौड़ धूप में
मानसरोवर काव्य मंचदिनांक:-१६.७.२५शीर्षक:-“जिंदगी की दौड़ धूप में”विधा:-कविता “ज़िन्दगी की दौड़ धूप में” ज़िन्दगी की दौड़ धूप में हम यह भूल गए,कि हम ही इसके सजीव मुख्य पात्र हैं। छोड़ कर जरूरत अपने वजूद की,औरों को मात देने में हम लग गये। ज़िन्दगी जब आधे से ज्यादा बीत गई,अटपटा सा महसूस हुआ, सांझ थीआई। दौड़े थे…
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भोलेनाथ
मंच को नमन महिला काव्य मंच, पश्चिमी रांची जिला इकाई।विषय : भोले नाथविधा: कविता बड़े ही सरल प्रकृत है, हमारे भोलेनाथ,वादा है उनका, रहते वो सदा हमारे साथ। दरबार में उनके, उठाया जिसने है हाथ,बिन बोले सुनते हैं सबके मन की बात। जहां हो,वहीं से पुकारा है जिसने उनका नाम,बनता अगले पल ही है,सबके बिगड़े…
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कहता है मन।
दिनांक:-१४जुलाई२०२५शीर्षक:-“कहता है मन”विधा:- कविता “कहता है मन” कहता है मन, तुम हो यहीं ,सदा मेरे पास।मज़ाक में भी , दूर जाने का ना दो आभास! गुजर गए कई साल,यह होता नहीं विश्वास।पल पल जुड़ती रहती है कुछ वज़ह खास! भूलता नहीं कभी, तुम्हारा वह परिहासमज़ाक में तुम जब रोक लेते अपनी श्वास।। बेचैनी से मैं…
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फांसी
अभी बहुत है माया बाकी मधुपान करा रही बन साकी बहुत दूर झलक है उसकी लेती उसका होंठों से नाम बीत रही इसी नाटक में शाम। वहां आवाज पहुंचती नहीं मेरी भटक रही बन माया की चेरी। कर रहा वह मेरा हि इंतजार पर मैं हू उसकी इच्छा से बेजार उम्र की इस दहलीज पर,…
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फांसी
अभी बहुत है माया बाकी मधुपान करा रही बन साकी बहुत दूर झलक है उसकी लेती उसका होंठों से नाम बीत रही इसी नाटक में शाम। वहां आवाज पहुंचती नहीं मेरी भटक रही बन माया की चेरी। कर रहा वह मेरा हि इंतजार पर मैं हू उसकी इच्छा से बेजार उम्र की इस दहलीज पर,…