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“मनमोहन बाल रूप कान्हा का”
समस्त देश को जन्माष्टमी की अनेक बधाई और शुभकामनाएं! बड़ा ही मनमोहक है, चंचल यह बाल रूप तुम्हारा।चित को यूं ठंडा करता जैसे हो चपल मेघ कजरारा।। इसमें भरी चंचलता ने मोहा है यह संसार सारा।सांवरा तेरा रूप बना रौशनी भरा ध्रुव तारा।। तेरी एक झलक पाने, गोकुल हर पल राह निहारा।“छछिया भर छाछ”से बहला,गोपी…
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“शिक्षक को श्रद्धा सुमन”
शुभ दिवस है ,शुभ घड़ी है,अर्पित है शिक्षक को श्रद्धा सुमन !ऋणि तन मन धन उत्कृष्ट,आपको हमारा शत शत नमन ! शिक्षक शिक्षा का सुफल-शिखर,प्रज्वलित दीप प्रखर है,सृष्टि के कण कण का यह प्रहरी,इसका विश्वस्त भविष्य है। ब्रह्मांड को विनीत विधाता, जैसे देता मोहक स्वरूप है,स्वयं का परिचय देकर ,शिक्षक लिखता इसका भविष्य है। पुण्यप्रकाशित…
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मंच को नमनमान सरोवर काव्य मंच।शीर्षक -यह कलियुग है जनाबतारीख -१२.१२.२४विधा-कविता “यह कलियुग है!” यह कलियुग है जनाब, चलता जहां अनियमितता की शक्ति।, लूट-पाट चोरी का है बोलबाला और गुंडों की दबंगई। धन के रंग से फर्क नहीं पड़ता,धन वाले पाते इज्जत। लिबास पहन कर सोफीयाना, सीधे लोगों को करते बेइज्जत! गरीब की होती…
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लेखनी का संसारभाव प्रतिबिम्ब चित्र आधार शब्द:बेबसी की जंजीरदिनांक -११.१२.२४ ये कैसा दिया है पंख मुझे ,कैची धार बीच जो है सजे?बंधन छोर मुख बीच फंसे,दोनों का घातक खेल चले! भूख अपनी मिटा नहीं सकती,बातें अपनी कह नहीं सकती।खुली ज़बान तो होऊंगी परकटी,आप ही दो बबूल बीच अटकी! लाचारी भरी है मेरी मनोदशा,काल-कलुषित कर नारी…
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“उम्मीद का हश्र “
क्यों बार बार इस उधेड़-बुन में रहती हूं। नई उम्मीद के साथ मैं राह निहारती हूं । इस बार शायद मेरा हाल तुम पूछोगे। दुखती मेरी रगों को तुम सहलाओगे। हाथों में लेकर हाथ हृदय से लगाओगे! मेरी शिकायत तुम आज दूर कर पाओगे । हर बार अपनी ज़िद पर तुम अड़े रहते हो! हर बार…